दीक्षांत समारोह में 142 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 93 छात्राएं शामिल
रांची, 24 सितंबर। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और उत्कृष्टता के नए मानदंड स्थापित करने का आह्वान किया। वे गुरुवार को रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि समारोह में 142 स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 93 छात्राएं हैं। यह बदलते भारत की प्रेरक तस्वीर है। बेटियां आज शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, तकनीक, खेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे शिक्षाविद्, राष्ट्रसेवी और विचारशील राष्ट्रनिर्माता थे। उन्होंने शिक्षा, राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय एकता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम से जुड़े विश्वविद्यालय का विद्यार्थी होना ऐसी परंपरा से जुड़ना है, जो ज्ञान के साथ साहस, विचार के साथ विवेक और अधिकार के साथ कर्तव्य की भावना को महत्व देती है।
राज्यपाल ने भारतीय शिक्षा-परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान-परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है। ‘विद्या ददाति विनयम्’ की परंपरा ज्ञान के साथ विनम्रता, विवेक और संस्कार के महत्व को बताती है। नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों ने भारत की ज्ञान-परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान केवल जानकारी का संचय नहीं, बल्कि तर्क, संवाद और सत्य की खोज की सतत प्रक्रिया है।
उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और दृष्टि का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और स्वचालन तेजी से जीवन एवं कार्यक्षेत्र की प्रकृति बदल रहे हैं। युवाओं को केवल तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय उसके रचनात्मक उपयोग और विकास में योगदान देना चाहिए। तकनीकी प्रगति मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी होनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने भविष्य को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। जहां संभव हो, रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार सृजन की सोच और क्षमता भी विकसित करनी चाहिए। ज्ञान, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
अपने करियर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पहली डिग्री इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में थी, लेकिन बाद में वे कानून और अर्थशास्त्र की ओर बढ़े। इसके बाद उन्होंने मौद्रिक नीति और वित्तीय विनियमन के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन और करियर में सीखने तथा आगे बढ़ने के लिए रास्ते बदलना भी संभव है।
सीखना कभी बंद नहीं होता : डॉ. राकेश मोहन
समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ. राकेश मोहन ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि जीवन में बड़े बदलाव का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने की सलाह दी और कहा कि अब से विद्यार्थी स्वयं अपने शिक्षक हैं।
उन्होंने कहा कि कॉलेज की शिक्षा स्पष्ट रूप से लिखने, पढ़ने, समझने और समस्याओं का समाधान करने जैसी बुनियादी क्षमताएं विकसित करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी ये मौलिक क्षमताएं महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।
डॉ. राकेश मोहन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की पिछले 35 वर्षों की औसत 6.5 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर बच्चों, विशेषकर लड़कियों की पहुंच में हुए सुधार की भी चर्चा की। ग्रामीण भारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आए सामाजिक बदलाव का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, निजी क्षेत्र और सरकार के साथ मिलकर योगदान देने की अपील की। साथ ही अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करने, केवल पेशेवर लक्ष्यों के पीछे नहीं भागने और अर्थपूर्ण जीवन जीने तथा रिश्तों को बनाए रखने पर जोर दिया।
6,415 विद्यार्थियों को मिलनी थी डिग्री
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजीव मनोहर ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के अध्ययन, अनुशासन और परिश्रम की परिणति है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय एक ज्ञान परंपरा का नाम है।
समारोह में यूजी सत्र 2022-25, पीजी सत्र 2023-25 एवं 2024-26, बीएड सत्र 2023-25 और पीएचडी के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। कुल 6,415 विद्यार्थियों को डिग्री मिलनी थी। दीक्षांत समारोह के लिए 3,535 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें 1,834 यूजी और 1,701 पीजी विद्यार्थी शामिल हैं।
स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। पीजी सत्र 2023-25 में विज्ञान संकाय से नेहा गोरुंग (गणित), सामाजिक विज्ञान से प्रेम ठाकुर (समाजशास्त्र), मानविकी से शुभम कुमार पांडेय (संस्कृत), वाणिज्य से एकता कुमारी (अकाउंट्स) और प्रोफेशनल कोर्स से विभा रानी (कंप्यूटर एप्लीकेशन) शामिल हैं।
पीजी सत्र 2024-26 में विज्ञान संकाय से सिमरन कुमारी (गणित), सामाजिक विज्ञान से आयुष राज (मनोविज्ञान), मानविकी से सौम्या कुमारी आर्या (संस्कृत), वाणिज्य से सूर्या कुमारी (अकाउंट्स) तथा प्रोफेशनल कोर्स में आयुषी कुमारी और जन्नत नूर (बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने बेहतर प्रदर्शन किया।
यूजी वर्ग में विज्ञान से लवली कुमारी (गणित), सामाजिक विज्ञान से प्रिया कुमारी (भूगोल), मानविकी से तनु कुमारी सिंह (संस्कृत), वाणिज्य से शुभकाम्ना सिंह (बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) और प्रोफेशनल कोर्स से अमृता कुमारी तिवारी (कंप्यूटर एप्लीकेशन) को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
