भूमि कानून एवं JPSC विशेष✓ सत्यापित संदर्भ (2026)
झारखंड में CNT Act (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908), SPT Act 1949 एवं PESA ग्राम सभा अधिकार सरल हिंदी गाइड
Reference Guide: CNT Act 1908, SPT Act 1949 & PESA Gram Sabha Land Laws in Jharkhand Guide
झारखंड के निवासियों, जमीन क्रेता-विक्रेताओं और JPSC सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए राज्य के दो सबसे महत्वपूर्ण भूमि सुरक्षा कानूनों—छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act, 1908) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act, 1949)—तथा पांचवीं अनुसूची व PESA ग्राम सभा अधिकारों की धारा-वार सरल हिंदी व्याख्या।
एक नज़र में मुख्य तथ्य (Quick Facts 2026)
CNT Act, 1908 लागू होने की तिथि11 नवंबर 1908 (प्रारूपकार: फादर जॉन हॉफमैन — 19 अध्याय एवं 271 धाराएं)
CNT Act का प्रभावी क्षेत्रउत्तरी छोटानागपुर, दक्षिणी छोटानागपुर, पलामू एवं कोल्हान प्रमंडल के 18 जिले
SPT Act, 1949 का प्रभावी क्षेत्रसंथाल परगना प्रमंडल के 6 जिले (दुमका, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, जामताड़ा — 9 अध्याय, 72 धाराएं)
भारतीय संविधान में सुरक्षा कवचCNT की धारा 46, 47, 48, 49, 71A, 71B व 240-242 संविधान की 9वीं अनुसूची (9th Schedule) में संरक्षित हैं
CNT Act 1908 एवं SPT Act 1949 की सबसे महत्वपूर्ण धाराएं (Sections) एवं प्रावधान
| अधिनियम एवं धारा (Section) | विषय / शीर्षक | कानूनी प्रावधान एवं जमीन खरीद-बिक्री नियम | सक्षम प्राधिकारी |
|---|---|---|---|
| CNT Act — धारा 46 (Section 46) | रैयत द्वारा भूमि अंतरण (खरीद-बिक्री) पर प्रतिबंध | अनुसूचित जनजाति (ST) का रैयत उपायुक्त (DC) की पूर्व अनुमति से केवल उसी थाना (Police Station) क्षेत्र के निवासी किसी अन्य ST व्यक्ति को ही जमीन बेच सकता है; SC और OBC का रैयत उसी जिले (District) के निवासी अपनी ही श्रेणी (SC को SC, OBC को OBC) के व्यक्ति को DC की अनुमति से जमीन अंतरित कर सकता है | उपायुक्त (Deputy Commissioner - DC) |
| CNT Act — धारा 47 (Section 47) | न्यायालय के आदेश से रैयती भूमि की कुर्की/नीलामी पर रोक | किसी भी दीवानी न्यायालय (Civil Court) की डिक्री या आदेश के तहत किसी रैयत के जोत के अधिकार का विक्रय नहीं किया जा सकता (केवल सरकारी भू-राजस्व या कृषि/बैंक ऋण की वसूली को छोड़कर) | दीवानी व राजस्व न्यायालय |
| CNT Act — धारा 48 (Section 48) | भुईंहरी (Bhuinhari) भूमि के अंतरण पर प्रतिबंध | उरांव जनजाति की पारंपरिक भुईंहरी भूमि के अंतरण पर भी धारा 46 के समान कड़े प्रतिबंध लागू हैं | उपायुक्त (DC) |
| CNT Act — धारा 49 (Section 49) | उद्योग, खनन या सार्वजनिक प्रयोजन हेतु भूमि अंतरण | धार्मिक, शैक्षणिक, धर्मार्थ, औद्योगिक या खनन प्रयोजन के लिए उपायुक्त की लिखित सहमति से जोत का अंतरण किया जा सकता है | उपायुक्त एवं राज्य सरकार |
| CNT Act — धारा 71A (Section 71A) | अवैध रूप से हस्तांतरित आदिवासी भूमि की वापसी (SAR Court) | यदि किसी ST रैयत की भूमि धारा 46 का उल्लंघन कर या कपटपूर्वक अंतरित की गई हो, तो उपायुक्त (SAR कोर्ट - Scheduled Area Regulation) जांच कर जमीन मूल आदिवासी रैयत को वापस (Restore) दिलाता है | SAR पदाधिकारी / उपायुक्त |
| CNT Act — धारा 13 से 20 | अधिभोगी रैयत (Occupancy Raiyat) एवं बंदोबस्त रैयत | किसी ग्राम में 12 वर्षों तक लगातार भूमि धारण करने वाले व्यक्ति को 'बंदोबस्त रैयत (Settled Raiyat)' और उसकी भूमि पर अधिभोग अधिकार प्राप्त होता है | अंचल / राजस्व न्यायालय |
| CNT Act — खुंटकट्टी अधिकार (अध्याय 18) | मुंडा खुंटकट्टीदार की विशेष सुरक्षा | मुंडा जनजाति के उन वंशजों की भूमि जिन्होंने मूल रूप से जंगल साफ कर गाँव बसाया (खुंटकट्टी भूमि); यह लगभग पूर्णतः अहस्तांतरणीय है | उपायुक्त (DC) |
| SPT Act 1949 — धारा 20 (Section 20) | संथाल परगना में रैयती भूमि का अहस्तांतरणीय होना | संथाल परगना के 6 जिलों में किसी भी रैयत (आदिवासी या गैर-आदिवासी) की जमाबंदी कृषि भूमि की बिक्री, दान, बंधक या पट्टा पूर्णतः प्रतिबंधित है (जब तक कि खेवट/खतियान में अंतरण का अधिकार स्पष्ट दर्ज न हो) | उपायुक्त (DC) |
| SPT Act — धारा 13 एवं 42 | रैयत का भूमि उपयोग अधिकार एवं अवैध कब्जा बेदखली | धारा 13 के तहत रैयत अपनी भूमि पर कच्चा/पक्का मकान बना सकता है, तालाब खोद सकता है और मछली पालन कर सकता है; धारा 42 के तहत उपायुक्त किसी भी समय अवैध कब्जाधारी को बेदखल कर सकता है | उपायुक्त (DC) |
| PESA अधिनियम 1996 (पांचवीं अनुसूची क्षेत्र) | अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सर्वोच्च शक्ति | झारखंड के अनुसूचित जिलों में लघु खनिज पट्टा, भूमि अधिग्रहण से पूर्व परामर्श, लघु वनोपज (लाह, तेंदूपत्ता, महुआ), हाट-बाजार प्रबंधन और मादक द्रव्य नियंत्रण का अधिकार पारंपरिक ग्राम सभा को है | ग्राम सभा (Gram Sabha) |
भुईंहरी, खुंटकट्टी और कोड़कर भूमि किसे कहते हैं?
- भुईंहरी (Bhuinhari) भूमि: उरांव जनजाति के उन मूल पूर्वजों द्वारा जंगल साफ कर तैयार की गई कृषि भूमि जिन्होंने सबसे पहले गाँव बसाया था (इसकी रक्षा के लिए 1869 में बाबू राखालदास हलदर के नेतृत्व में भुईंहरी सर्वे हुआ था)।
- मुंडारी खुंटकट्टी (Mundari Khuntkatti) भूमि: मुंडा जनजाति द्वारा सामूहिक रूप से जंगल साफ कर बसाए गए खुंट (परिवार/वंश) की भूमि, जिस पर पूरे खुंट का सामूहिक स्वामित्व होता है।
- कोड़कर (Korkar) भूमि (CNT धारा 64-67): किसी कृषक द्वारा टाँड़ (बंजर/ऊपरी भूमि) या जंगल को कोड़कर (समतल बनाकर) धान की खेती योग्य (दोन भूमि) में बदलने वाली भूमि, जिस पर पहले 4 वर्षों तक कोई लगान नहीं लगता और उसके बाद सामान्य दर का आधा लगान लगता है।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा (JPSC / JSSC CGL / Police) विशेष नोट:JPSC Prelims Paper-2 में अकेले 'CNT Act (5 प्रश्न = 10 अंक)' और 'SPT Act (5 प्रश्न = 10 अंक)' तथा अन्य राज्य भूमि कानूनों (2 प्रश्न = 4 अंक)—यानी कुल 12 प्रश्न (24 अंक)—सीधे इसी गाइड से आते हैं!
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झारखंड में CNT Act (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908), SPT Act 1949 एवं PESA ग्राम सभा अधिकार सरल हिंदी गाइड — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
CNT Act की धारा 46 के अनुसार: (1) अनुसूचित जनजाति (ST) की भूमि केवल उसी पुलिस थाना (Police Station) क्षेत्र के निवासी किसी अन्य ST को ही उपायुक्त (DC) की अनुमति से बेची जा सकती है; जबकि (2) अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) की भूमि उसी पूरे जिले (District) के निवासी क्रमशः SC या OBC व्यक्ति को DC की अनुमति से बेची जा सकती है।
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