कला एवं संस्कृति✓ सत्यापित संदर्भ (2026)
झारखंड के प्रमुख पर्व-त्योहार, जनजातीय संस्कृति, लोक नृत्य (छऊ, पाइका) एवं GI-टैग सोहराय कला गाइड
Reference Guide: Major Tribal Festivals (Sarhul, Karma, Sohrai, Tusu), Folk Dances & Art of Jharkhand
झारखंड की 32 जनजातियों (जिनमें 8 आदिम जनजातियाँ - PVTG शामिल हैं) की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत: प्रकृति पर्व सरहुल, भाई-बहन के प्रेम का पर्व करमा, पशुधन सम्मान का पर्व सोहराय, मकर संक्रांति का टुसू पर्व, यूनेस्को विरासत छऊ नृत्य और GI-टैग प्राप्त सोहराय-कोहबर चित्रकला का संपूर्ण विवरण।
एक नज़र में मुख्य तथ्य (Quick Facts 2026)
झारखंड में कुल अधिसूचित जनजातियाँ32 जनजातियाँ (जिनमें 8 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह - PVTG हैं)
जनसंख्या की दृष्टि से 4 सबसे बड़ी जनजातियाँ1. संथाल (Santhal), 2. उरांव (Oraon), 3. मुंडा (Munda), 4. हो (Ho)
8 आदिम जनजातियाँ (PVTG)असुर, बिरहोर, बिरजिया, कोरवा, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, सबर और परहिया
GI-Tag प्राप्त झारखंडी चित्रकलासोहराय और कोहबर पेंटिंग (हजारीबाग क्षेत्र — मई 2020 में GI टैग प्राप्त)
झारखंड के प्रमुख पर्व-त्योहार, तिथि एवं सांस्कृतिक महत्व
| पर्व-त्योहार का नाम | कब मनाया जाता है? | संबंधित समुदाय / क्षेत्र | मुख्य विशेषता एवं परंपरा |
|---|---|---|---|
| सरहुल (Sarhul — खद्दी / बाहा / बा परब) | चैत्र शुक्ल तृतीया (वसंत ऋतु) | उरांव (खद्दी), संथाल (बाहा), मुंडा (बा परब) व संपूर्ण झारखंड | साल (सखुआ) के वृक्ष और प्रकृति की पूजा; सरना स्थल पर पाहन द्वारा 3 घड़ों के जल से वर्षा की भविष्यवाणी |
| करमा पर्व (Karma Puja) | भाद्रपद शुक्ल एकादशी | आदिवासी एवं सदान दोनों समुदाय | भाई के दीर्घायु और समृद्धि हेतु बहनें उपवास रखकर अखड़ा में करम डाल (वृक्ष) की पूजा और जावा जगाती हैं |
| सोहराय पर्व (Sohrai) | कार्तिक अमावस्या (दीपावली के अगले दिन) व पूस माह (संथाल परगना) | संथाल, उरांव, मुंडा व कुर्मी/सदान किसान | कृषि कार्य में सहयोगी गौवंश (गाय-बैल) का श्रृंगार व पूजन तथा घरों की दीवारों पर सोहराय चित्रकारी |
| टुसू पर्व (Tusu Parab / मकर) | पौष माह के अंतिम दिन (14-15 जनवरी मकर संक्रांति) | पंचपरगना, कुड़मी एवं संपूर्ण छोटानागपुर-कोल्हान | कन्याएं रंगीन कागज व बांस से 'चौड़ल' बनाकर टुसू गीत गाती हैं और नदी (स्वर्णरेखा/दामोदर) में विसर्जन करती हैं |
| मागे परब (Mage Porob) | माघ माह की पूर्णिमा | हो (Ho) जनजाति (कोल्हान क्षेत्र) | नया कृषि वर्ष प्रारंभ होने और कृषि श्रमिकों (धांगर) के सम्मान का मुख्य पर्व |
| जनी शिकार (Jani Shikar) | प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर | उरांव जनजाति की महिलाएं | रोहतासगढ़ किले की ऐतिहासिक स्मृति में महिलाएं पुरुष वेश धारण कर सामूहिक शिकार की परंपरा निभाती हैं |
| मंडा पर्व (Manda Puja) | वैशाख / ज्येष्ठ माह | छोटानागपुर व हजारीबाग क्षेत्र | भगवान महादेव (शिव) की कठोर भक्ति; भोक्तागण दहकते अंगारों पर चलते हैं (फूलखुंदी) और झूलन करते हैं |
| भगता परब (Bhagta Parab) | वसंत और ग्रीष्म के मध्य | तमाड़ एवं छोटानागपुर क्षेत्र | बूढ़ा बाबा की पूजा और छऊ नृत्य के साथ साहसिक करतब |
झारखंड के प्रमुख लोक नृत्य एवं चित्रकला (Folk Dances & Paintings)
- छऊ नृत्य (Chhau Dance): सरायकेला-खरसावाँ से उत्पन्न मुखौटा आधारित शास्त्रीय/लोक नृत्य जिसे 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया (मानभूम व खूंटी की 'सिंभुआ छऊ' शैली भी प्रसिद्ध है)।
- पाइका नृत्य (Paika Dance): मुंडा व सदान समाज का वीर रस से ओतप्रोत युद्ध नृत्य, जिसमें नर्तक ढाल और तलवार लेकर सैनिक वेशभूषा में नृत्य करते हैं।
- झूमर, डमकच, फगुआ और करिया झूमर: विवाह के अवसर पर आँगन में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला हास्य-व्यंग्य नृत्य 'डमकच' कहलाता है।
- जादोपटिया, सोहराय और कोहबर चित्रकला: संथाल परगना की स्क्रॉल पेंटिंग 'जादोपटिया' तथा हजारीबाग की गुफा परंपरा से जुड़ी 'सोहराय' (प्रकृति/पशु चित्रण) और 'कोहबर' (विवाह कक्ष चित्रण) विश्वप्रसिद्ध हैं।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा (JPSC / JSSC CGL / Police) विशेष नोट:JPSC Prelims Paper-2 (15 प्रश्न = 30 अंक) और JSSC CGL में जनजातीय पर्वों के स्थानीय नाम (जैसे उरांव में सरहुल को 'खद्दी' और संथाल में 'बाहा' कहते हैं), युवागृह (उरांव का 'धुमकुड़िया' व मुंडा का 'गीतिओड़ा') और GI टैग पेंटिंग से सीधे प्रश्न बनते हैं।
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झारखंड के प्रमुख पर्व-त्योहार, जनजातीय संस्कृति, लोक नृत्य (छऊ, पाइका) एवं GI-टैग सोहराय कला गाइड — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सरहुल को उरांव जनजाति में 'खद्दी (Khaddi)', संथाल जनजाति में 'बाहा परब (Baha)', मुंडा और हो जनजाति में 'बा परब (Ba Parab)' तथा खड़िया जनजाति में 'जकोर' के नाम से जाना जाता है।
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