इतिहास एवं महानायक✓ सत्यापित संदर्भ (2026)
झारखंड का इतिहास, जनजातीय विद्रोह (संथाल हूल, उलगुलान) एवं अलग राज्य आंदोलन के महानायक
Reference Guide: History of Jharkhand, Tribal Revolts (Santhal Hul, Birsa Munda Ulgulan) & Statehood Movement
अंग्रेजी हुकूमत और महाजनी शोषण के विरुद्ध झारखंड की धरती पर लड़े गए ऐतिहासिक जनजातीय विद्रोहों—तिलका मांझी विद्रोह, कोल विद्रोह, संथाल हूल (1855), भगवान बिरसा मुंडा का उलगुलान (1895-1900), ताना भगत आंदोलन—से लेकर मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में 15 नवंबर 2000 को 28वें राज्य के रूप में झारखंड गठन तक का प्रामाणिक इतिहास।
एक नज़र में मुख्य तथ्य (Quick Facts 2026)
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का जन्म15 नवंबर 1875 (उलीहातू, खूंटी) — शहादत: 9 जून 1900 (राँची जेल)
संथाल हूल (विद्रोह) का नेतृत्वसिदो, कान्हू, चाँद और भैरव मुर्मू तथा वीरांगना फूलो-झानो (30 जून 1855, भोगनाडीह)
झारखंड राज्य गठन की तिथि15 नवंबर 2000 (भारत का 28वाँ राज्य — बिहार के 46% दक्षिणी भूभाग को अलग कर)
प्रथम राज्यपाल एवं प्रथम मुख्यमंत्रीप्रथम राज्यपाल: प्रभात कुमार | प्रथम मुख्यमंत्री: बाबूलाल मरांडी
झारखंड के प्रमुख जनजातीय विद्रोह एवं स्वतंत्रता आंदोलन कालक्रम (Timeline)
| विद्रोह / आंदोलन का नाम | कालखंड (वर्ष) | प्रमुख नायक / नेतृत्वकर्ता | मुख्य क्षेत्र एवं ऐतिहासिक परिणाम |
|---|---|---|---|
| ढाल विद्रोह (झारखंड में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम विद्रोह) | 1767 – 1777 | जगन्नाथ ढाल | सिंहभूम (धालभूम) क्षेत्र; अंग्रेजों को अंततः जगन्नाथ ढाल को पुनः राजा मानना पड़ा |
| चुआड़ विद्रोह एवं घटवाल विद्रोह | 1769 – 1805 | रघुनाथ महतो, दुर्जन सिंह, श्याम गंजम | जंगल महल, सिंहभूम व मानभूम; नारा: 'अपना गाँव अपना राज, दूर भगाओ विदेशी राज' |
| तिलका मांझी आंदोलन (जबरा पहाड़िया) | 1783 – 1785 | बाबा तिलका मांझी | संथाल परगना व भागलपुर; 1784 में क्लीवलैंड को तीर से मारा, 1785 में भागलपुर में बरगद पेड़ पर फांसी (प्रथम आदिवासी शहीद) |
| तमाड़ विद्रोह एवं चेरो विद्रोह | 1782 – 1821 / 1800 | ठाकुर भोलानाथ सिंह / भूषण सिंह | राँची (तमाड़) एवं पलामू क्षेत्र |
| कोल विद्रोह (Kol Mutiny) | 1831 – 1832 | बुद्धू भगत, सिंदराय-बिंदराय मानकी, सुर्गा मुंडा | छोटानागपुर; परिणामस्वरूप 1833 में 'दक्षिण-पश्चिम फ्रंटियर एजेंसी (SWFA)' और विल्किंसन रूल लागू हुआ |
| भूमिज विद्रोह (गंगा नारायण का हंगामा) | 1832 – 1833 | गंगा नारायण सिंह | मानभूम व बाड़ाभूम क्षेत्र |
| संथाल हूल (Santhal Rebellion / प्रथम जनक्रांति) | 1855 – 1856 | सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव एवं फूलो-झानो मुर्मू | भोगनाडीह (साहिबगंज); परिणामस्वरूप 1855 में अलग 'संथाल परगना जिला' और 'SPT नॉन-रेगुलेशन व्यवस्था' बनी |
| 1857 की क्रांति में झारखंड का योगदान | 1857 – 1858 | ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, पांडेय गणपत राय, टिकैत उमराव सिंह, शेख भिखारी, नीलांबर-पीतांबर | रोहिणी (देवघर) से शुरुआत; राँची, चतरा, हजारीबाग और पलामू में भीषण संघर्ष |
| सरदारी (मुल्की) लड़ाई एवं खरवार आंदोलन | 1858 – 1895 / 1874 | भागीरथ मांझी (बाबा) — खरवार आंदोलन | भूमि वापसी और सामाजिक-धार्मिक सुधार |
| बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' (महान हलचल) | 1895 – 1900 | धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा एवं गया मुंडा | डोंबारी बुरू (खूंटी); परिणामस्वरूप 1908 में ऐतिहासिक 'छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act)' बना |
| ताना भगत आंदोलन (अहिंसक गांधीवादी आंदोलन) | 1914 | जतरा भगत (चिंगरी नवाटोली, गुमला) | लगान बंदी व अहिंसा का मार्ग; महात्मा गांधी के असहयोग व सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भागीदारी |
| अलग झारखंड राज्य आंदोलन | 1912 – 2000 | जे. बार्थोलोमन (1912), जयपाल सिंह मुंडा (आदिवासी महासभा 1939 / झारखंड पार्टी 1950), बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन, ए.के. रॉय (JMM 1973), निर्मल महतो, सूर्य सिंह बेसरा (AJSU 1986) | बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 पारित होकर 15 नवंबर 2000 को झारखंड भारत का 28वाँ राज्य बना |
झारखंड आंदोलन के ऐतिहासिक संगठन एवं वर्ष (JPSC/JSSC Special)
- 1912: चाईबासा के निवासी और ढाका विद्यार्थी परिषद के सदस्य 'जे. बार्थोलोमन' ने 'क्रिश्चियन स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन' की स्थापना की, जिसे अलग झारखंड आंदोलन का बीजारोपण माना जाता है।
- 1915: छोटानागपुर उन्नति समाज (जुएल लकड़ा, ठेबले उरांव, पॉल दयाल) | 1930: किसान सभा (ठेबले उरांव)।
- 1938-1939: आदिवासी महासभा (1939 में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा इसके अध्यक्ष बने, जिन्होंने 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी कर पहला स्वर्ण पदक दिलाया था) | 1950: झारखंड पार्टी का गठन।
- 4 फरवरी 1973: धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में बिनोद बिहारी महतो (अध्यक्ष), शिबू सोरेन (महासचिव) और मार्क्सवादी समन्वय समिति के ए.के. रॉय द्वारा 'झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)' की स्थापना की गई।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा (JPSC / JSSC CGL / Police) विशेष नोट:JPSC Prelims Paper-2 में 'झारखंड का इतिहास (8 प्रश्न)' और 'झारखंड आंदोलन एवं राज्य गठन (7 प्रश्न)' से कुल 15 प्रश्न (30 अंक) सीधे इसी तालिका के तथ्यों से पूछे जाते हैं।
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झारखंड का इतिहास, जनजातीय विद्रोह (संथाल हूल, उलगुलान) एवं अलग राज्य आंदोलन के महानायक — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
बिरसा मुंडा के उलगुलान (1895-1900) के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार को गुमला (1902) और खूंटी (1903) अनुमंडल बनाने पड़े और फादर जॉन हॉफमैन की सहायता से 11 नवंबर 1908 को आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए 'छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act, 1908)' लागू करना पड़ा।
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