हिंदी दिवस पर प्रमंडलीय राजभाषा कार्यालय राँची में भव्य कार्यक्रम
गांडीव रिपोर्टर,
रांची। प्रमंडलीय राजभाषा कार्यालय दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल राँची द्वारा आज दिनांक 14 सितम्बर को कार्यालय सभागार में हिंदी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि के रूप में जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने की। श्री भजन्त्री ने अपने उद्बोधन में राजभाषा हिंदी के महत्व, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार पर विशेष बल देते हुए सभी को हिंदी के व्यापक उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि हिंदी कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। यह केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और भावात्मक एकजुटता की सशक्त अभिव्यक्ति है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत एवं माल्यार्पण से हुआ। संचालन उप निदेशक, राजभाषा श्री रविशंकर मिश्रा ने किया। मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन कर समारोह का औपचारिक उद्घाटन किया गया। स्वागत भाषण भी श्री रविशंकर मिश्रा ने प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि श्री संजय कुमार भगत ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी सदर कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) धनंजय, अपर समाहर्ता रामनारायण सिंह, उप परिवहन आयुक्त सह सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार अजय कुमार रजक, उप निर्वाचन पदाधिकारी बिवेक सुमन तथा आयुक्त कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि ने मातृभाषा में अध्ययन-पठन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे किशोरों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलता है। एआई युग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज मौलिक सोच और भाषा की समृद्धि बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसलिए हिंदी को विज्ञान, नवाचार, शोध और रोजगारपरक बनाने पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है।
इसके पश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. जंगबहादुर पाण्डेय, डॉ. राजश्री जयन्ती, डॉ. सुरिन्दर कौर “नीलम”, श्री नसीर अफसर, श्री नरेश कुमार बंका, श्रीमती शालिनी नायक, श्री सदानन्द सिंह यादव, श्री सूरज श्रीवास्तव, डॉ. रजनी शर्मा “चन्दा” एवं डॉ. विनोद सिंह गहरवार ने अपनी कविताओं का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन आयुक्त के सचिव, दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल, राँची रविन्द्र कुमार गगराई द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यक्रम राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।




