रांची में आज न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत चयनित लगभग 1932 अभ्यर्थियों की नौकरी को सुरक्षित रखा है। अदालत ने उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जो अभ्यर्थियों की सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न कर रही थी, और उन्हें बिना किसी रुकावट के अपनी नौकरी जारी रखने का आदेश दिया है।
भाजपा ने उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अधूरी जांच के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार सभी चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, अदालत में कोई ठोस तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह सिद्ध हो सके कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई थी।
सरकार की जल्दबाजी पर आरोप
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं के आंदोलन और अपनी नाकामी को छिपाने के लिए यह निर्णय जल्दबाजी में लिया। उन्होंने कहा कि सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक समान समझना चाहिए था। अदालत ने भी सेग्रीगेशन की बात की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोषियों और निर्दोषों के बीच भेद किया जाना चाहिए।
