आदिवासी नेत्री निशा भगत ने आत्महत्या करने का प्रयास किया है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आत्मघाती कदम उठाने से पहले उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन किया और लाइव वीडियो के दौरान अपनी जान देने की बात कही। इस वीडियो में निशा भगत ने कहा कि वह अकेले संघर्ष कर रही हैं और उनके साथ कोई नहीं है।

आरोपों और नाराजगी का इजहार

लाइव वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस कदम से उनके माता-पिता को बहुत दुख होगा। निशा ने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें आरएसएस और बीजेपी के लोगों का भी समर्थन नहीं मिल रहा है, जिससे वह और अधिक आहत हैं।

सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव

इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी समुदाय में सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव को उजागर किया है। निशा भगत की स्थिति ने यह दर्शाया है कि कैसे कई समुदायों के नेता अपने अधिकारों और प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ गलत प्रचार और आरोपों का सामना करना पड़ता है।