रामगढ़। जिले के नेमरा गांव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। मां को अंतिम विदाई देते समय मुख्यमंत्री बेहद भावुक नजर आए। इस दौरान वहां मौजूद सोरेन परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और अन्य सभी लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, विधायक मथुरा महतो, शिकारीपाड़ा विधायक राजेश कश्यप, शिल्पा नेहा तिर्की, महुआ माजी और ममता देवी समेत कई प्रमुख नेता पहुंचे। इसके अलावा जेएमएम और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता के अलावा पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग भी नेमरा पहुंचे।
साथ ही राज्य सरकार के अधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी भी नेमरा पहुंचे। प्रशासन ने अंतिम संस्कार को लेकर व्यापक सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। अंतिम संस्कार के दौरान पूरा नेमरा गांव शोक में डूबा रहा। रूपी सोरेन के निधन के बाद से ही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ स्थानीय लोग सोरेन परिवार के पैतृक गांव नेमरा पहुंचकर परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की धर्मपत्नी दिवंगत रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। गांव स्थित आवास पर संथाली परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम विदाई की धार्मिक रस्में निभाई गयी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ढेकानाला घाट ले जाया गया। दिवंगत रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार नेमरा गांव के ढेकानाला घाट पर किया गया। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार किया गया था। ठीक उसी स्थान के समीप पूरे राजकीय सम्मान के साथ रूपी सोरेन का भी अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
अंतिम यात्रा और संस्कार में शामिल होने के लिए राज्यभर से भारी संख्या में लोग नेमरा पहुंचे। भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने वाहनों को गांव से काफी पहले ही रोक दिया । लुकैयाटांड़ और धुमकुड़िया भवन के पास पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है, जहां से लोग लगभग सात किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री के पैतृक आवास तक पहुंच रहे थे।
सुरक्षा व्यवस्था के दौरान नेमरा में तैनात झारखंड पुलिस के जवान आनंद कुमार अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। उनके मुंह से खून निकलने के कारण मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि, वहां तैनात मेडिकल टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत सीपीआर दिया और स्थिति को संभालते हुए बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार के दौरान जुटी विशाल भीड़ के अनुभवों से सबक लेते हुए, इस बार जिला प्रशासन सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर बेहद सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए झारखंड सशस्त्र पुलिस की कई कंपनियां देर रात से ही गांव में तैनात कर दी गई थी। अतिथियों और आम जनता की सहूलियत के लिए गोला-मुरी मार्ग पर त्वरित मरम्मत कार्य कराया गया है ताकि आवागमन बाधित न हो। जगह-जगह तोरण द्वार और बैरिकेडिंग की गई है। मार्ग में दिवंगत रूपी सोरेन की तस्वीरों वाले कटआउट लगाए गए हैं, जिन पर अंतिम जोहार और विनम्र श्रद्धांजलि संदेश लिखे हैं।