जैन महासभा पहुंची राज्यपाल के पास
रांची। गिरिडीह की पारसनाथ पहाड़ी एक बार फिर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चर्चा में है। जैन धर्मावलंबियों के लिए सर्वोच्च तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी और संथाल, मुंडा व हो समेत कई आदिवासी समुदायों के लिए मरांग बुरु की आस्था से जुड़े इस पर्वतराज को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा ने तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से हस्तक्षेप की मांग की है, वहीं दूसरी ओर मधुबन में 4 और 5 नवंबर को होने वाले मरांग बुरु धर्मगाढ़ महासम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं।
श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को रांची स्थित लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपकर श्री सम्मेद शिखरजी की धार्मिक गरिमा बनाए रखने और तीर्थ क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की। महासभा ने अपने ज्ञापन में कहा कि गिरिडीह स्थित सम्मेद शिखरजी जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ है। जैन मान्यताओं के अनुसार, 24 तीर्थंकरों में से 20 सहित अनेक सिद्धात्माओं ने इसी पवित्र पर्वतराज पर मोक्ष प्राप्त किया था। इस कारण यह स्थल देश-विदेश के जैन श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक महत्व रखता है। प्रतिनिधिमंडल ने पर्वतराज और तीर्थ क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बलों की व्यवस्था करने, प्रवेश मार्गों पर जांच और निगरानी बढ़ाने तथा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने का आग्रह किया।
इसके अलावा स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और आवागमन को बेहतर बनाने की जरूरत भी बताई गई। महासभा ने राज्यपाल से राज्य सरकार और संबंधित प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया।
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पारसनाथ पर फिर तेज हुई आस्था की हलचल

जैन महासभा पहुंची राज्यपाल के पास रांची। गिरिडीह की पारसनाथ पहाड़ी एक बार फिर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चर्चा में है।
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