ग्रामीण इलाकों में आर्थिक संकट के चलते लोग कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। आधार और पैन कार्ड के माध्यम से 50 हजार से 75 हजार रुपये तक का कर्ज आसानी से मिल जाता है, लेकिन स्थायी रोजगार की कमी और नियमित आमदनी न होने के कारण परिवार समय पर किस्त जमा नहीं कर पा रहे हैं।

कर्ज का चक्र

ग्रामीणों के मुताबिक, एक कंपनी की किस्त चुकाने के लिए लोग दूसरी कंपनी से कर्ज लेने पर मजबूर हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में धीरे-धीरे वे कई कंपनियों के कर्ज में फंस जाते हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और भी खराब हो जाती है।

महिलाओं पर बढ़ता दबाव

इस संकट का एक और पहलू यह है कि रोजगार की तलाश में पुरुष अक्सर दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, जिसके कारण घर पर मौजूद महिलाओं पर किस्तें चुकाने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार दबाव और तकादे के चलते महिलाएं भी मानसिक तनाव का सामना कर रही हैं।