रांची। झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को तीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पीडीजे) ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इनमें मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक ने तीनों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। तीनों के शपथ लेने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 16 हो गई।

शपथ ग्रहण समारोह हाईकोर्ट के ग्राउंड फ्लोर पर आयोजित किया गया। समारोह की शुरुआत तीनों नवनियुक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित वारंट पढ़े जाने के साथ हुई। इसके बाद क्रमशः मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। समारोह में हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों के अलावा अन्य न्यायिक अधिकारी और अतिथि मौजूद रहे।

शपथ लेने से पहले मनोज प्रसाद गढ़वा, अखिल कुमार साहेबगंज और राम शर्मा डालटनगंज में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे।

शपथ ग्रहण के बाद तीनों नवनियुक्त न्यायाधीशों ने अलग-अलग खंडपीठ में बैठकर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई भी की। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक के साथ न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के साथ न्यायमूर्ति अखिल कुमार तथा न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय के साथ न्यायमूर्ति राम शर्मा की खंडपीठ ने मामलों की सुनवाई की।

मनोज प्रसाद का न्यायिक सफर

मनोज प्रसाद का जन्म वर्ष 1973 में देवघर में हुआ। उन्होंने सेंट फ्रांसिस स्कूल, देवघर से स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 1988 में आईसीएसई से दसवीं और 1990 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पटना विश्वविद्यालय से स्नातक किया। वर्ष 1998 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की।

वर्ष 1999 में बिहार स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए और देवघर जिला न्यायालय में मुख्य रूप से सिविल मामलों की वकालत की। चार मई 2012 को वे एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर, रांची के रूप में झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। इसके बाद न्यायिक सेवा के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक पहुंचे।

पटना से शुरू हुआ अखिल कुमार का न्यायिक सफर

अखिल कुमार का जन्म छह जनवरी 1972 को पटना में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई। वर्ष 1986 में मैट्रिक और 1988 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज से समाजशास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक किया।

वर्ष 1999 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी वर्ष अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट और पटना जिला न्यायालय में सिविल एवं आपराधिक मामलों की वकालत की। बाद में न्यायिक सेवा में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए साहेबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने।

दिल्ली से झारखंड हाईकोर्ट तक राम शर्मा का सफर

राम शर्मा का जन्म सात जुलाई 1968 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने सीबीएसई से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1984 में मैट्रिक और 1986 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 1994 में एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद उसी वर्ष दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया।

उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और विभिन्न जिला अदालतों में सिविल एवं आपराधिक मामलों की वकालत की। 26 मई 2012 को वे झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। न्यायिक सेवा के दौरान विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक पहुंचे। बुधवार को उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।