झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज स्वर्गीय निशा भगत के पैतृक गांव गुमला जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नम आंखों से उनके पार्थिव शरीर पर मिट्टी डालकर अंतिम विदाई दी और उनके परिवार को ढांढस बंधाया। इस दौरान, दास ने राज्य सरकार से निशा भगत के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

निशा भगत की याद में प्रतिमा लगाने की मांग

इसके साथ ही, गुमला में प्रमुख चौराहे पर निशा भगत की प्रतिमा लगाने की भी मांग की गई ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद रहे। दास ने कहा कि झारखंड की आदिवासी बेटी निशा भगत की अकाल मौत पर पूरा राज्य गमगीन है। उन्होंने सवाल उठाया कि आत्महत्या के लिए उन्हें किसने मजबूर किया, यह जानना जरूरी है।

भू माफियाओं पर आरोप और सरकार की चुप्पी

दास ने निशा भगत के बलिदान को धर्मांतरण करने वाली संस्थाओं और जिहादी मानसिकता को समर्थन देने वाली राज्य सरकार के लिए ताबूत में अंतिम कील बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना आदिवासी सरकार के माथे पर एक कलंक है। भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कम है, जबकि कई बड़े नेताओं पर जमीन हड़पने के आरोप हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेता कार्तिक उरांव ने भी धर्मांतरण करने वाले ईसाइयों के आरक्षण का विरोध किया था, और निशा भगत भी उसी राह पर चल रही थीं। आत्महत्या से पूर्व उन्होंने अपने वीडियो में दोषियों का नाम लिया था, जिसमें भू माफिया और सिस्टम द्वारा उन्हें जिंदा नहीं रहने देने की बात कही थी। दास ने मुख्यमंत्री और पूरी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक होनहार आदिवासी बेटी की आत्महत्या के मामले में गंभीर चिंता का विषय है।