रांची। झारखंड की विभिन्न जेलों में सजा काट रहे कैदियों के हुनर का कोई सानी नहीं है। उनके हाथों से तैयार कलाकृतियां और सजावटी सामान इतने आकर्षक हैं कि प्रशिक्षित कारीगर भी उनकी कला की सराहना करने को मजबूर हो जाएं। दीपावली के अवसर पर झारखंड के विभिन्न केंद्रीय कारागारों में बंद कैदी डिजाइनर दीये और रंग-बिरंगी मोमबत्तियां तैयार कर रहे हैं। राजधानी रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार, हजारीबाग के जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, जमशेदपुर, दुमका और डालटेनगंज सहित राज्य की विभिन्न जेलों में इन उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। कैदियों के हाथों से तैयार ये दीये और मोमबत्तियां दीपावली पर सैकड़ों घरों को रोशन करने के साथ उनके हुनर को भी नई पहचान दे रही हैं।
झारखंड के कई केंद्रीय कारागारों में कैदी दीपावली के लिए दीये और मोमबत्तियां बनाने में जुटे हैं। इनमें राजधानी रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार, हजारीबाग का जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, जमशेदपुर, दुमका और डालटेनगंज सहित अन्य जेल शामिल हैं। कैदी मिट्टी के दीयों को अलग-अलग रंगों और आकर्षक डिजाइनों से सजाते हैं। उनके हाथों से तैयार ये दीये देखने में बेहद खूबसूरत होते हैं। वहीं, विभिन्न रंगों और आकारों में बनाई जा रही मोमबत्तियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इन उत्पादों के माध्यम से कैदियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।
कैदियों को दीये और मोमबत्तियां बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल गृह एवं कारा विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। मिट्टी के दीये बनाने के लिए जेल परिसर या खेतों से चिकनी मिट्टी लाई जाती है। इसके बाद कैदियों को दीये तैयार करने के लिए सांचे दिए जाते हैं। दीये तैयार होने के बाद उन्हें अलग-अलग रंगों से सजाया जाता है, जिससे उनकी सुंदरता बढ़ जाती है। दूसरी ओर, मोमबत्तियां बनाने के लिए बाजार से मोम, धागा और रंग खरीदे जाते हैं। इन सामग्रियों की मदद से कैदी आकर्षक मोमबत्तियां तैयार करते हैं। दीपावली के दौरान कैदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए विभिन्न मेलों में स्टॉल लगाए जाते हैं। जेल प्रशासन की ओर से इन मेलों में स्टॉल लेकर दीये, मोमबत्तियां और अन्य हस्तनिर्मित सामान बिक्री के लिए रखे जाते हैं। मिट्टी के दीये 3 से 5 रुपये प्रति पीस की कीमत पर उपलब्ध होते हैं, जबकि मोमबत्तियों की कीमत 5 से 50 रुपये तक होती है। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग बंदी कल्याण फंड के लिए किया जाता है। इससे कैदियों के बनाए उत्पादों को बाजार मिलता है और उनके हुनर को प्रोत्साहन भी मिलता है।
रांची सिविल कोर्ट में भी खरीदे जा सकते हैं कैदियों के बनाए उत्पाद
राजधानी रांची के सिविल कोर्ट के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरे में कैदियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाते हैं। यहां आम लोग दीये और मोमबत्तियों के अलावा कैदियों के हाथों से बने अन्य सामान भी खरीद सकते हैं। इसके अतिरिक्त, झारखंड के कई जिलों में कैदियों के उत्पादों की बिक्री के लिए चलंत बिक्री केंद्र भी संचालित किए जाते हैं। इन केंद्रों को साप्ताहिक बाजारों और हाट में लगाया जाता है, जहां लोग आसानी से हस्तनिर्मित सामान खरीद सकते हैं। दीपावली जैसे त्योहारों पर कैदियों द्वारा तैयार दीये और मोमबत्तियां लोगों के लिए खरीदारी का एक विशेष विकल्प बन रहे हैं। इन उत्पादों की बिक्री से बंदी कल्याण फंड को सहयोग मिलता है और कैदियों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इस पहल के जरिए जेलों में बंद कैदियों की रचनात्मक क्षमता को सामने लाने के साथ उनके बनाए उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इस दीपावली में उनके हाथों से बने डिजाइनर दीये और मोमबत्तियां घरों को रोशन करने के साथ उनके हुनर की पहचान भी बनेंगी।