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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
बिहार के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का दामन थाम लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। सूरजभान, जो कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और उनके भाई पशुपति पारस के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, ने हाल ही में आरजेडी से जुड़कर राजनीतिक दिशा में एक नया मोड़ लिया है। एनडीए से बाहर होने के बाद, पशुपति पारस की राजनीतिक संभावनाओं पर जो संकट आया है, उसके बीच सूरजभान का आरजेडी में शामिल होना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वीणा देवी की चुनावी चुनौती
सूरजभान सिंह की पत्नी, पूर्व सांसद वीणा देवी, मोकामा सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं, जहाँ वे बाहुबली अनंत सिंह और जेडीयू के उम्मीदवार के खिलाफ अपनी किस्मत आज़माएँगी। इस सीट को अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र माना जा रहा है, जहाँ दो बड़े नेता आमने-सामने हैं। आरजेडी ने सूरजभान के माध्यम से **भूमिहार समुदाय** का समर्थन हासिल करने की कोशिश की है।
छपरा सीट पर खेसारी लाल की पत्नी की दावेदारी
इसके अलावा, भोजपुरी गायक खेसारी लाल की पत्नी चंदा को भी आरजेडी का प्रतीक चिह्न प्राप्त हुआ है। वे छपरा सीट से चुनाव लड़ेंगी, जहाँ उनका मुकाबला भाजपा की महिला उम्मीदवार छोटी कुमारी से होगा। इससे छपरा सीट का राजनीतिक परिदृश्य और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि यहां यादव, राजपूत, ब्राह्मण, बनिया और मुस्लिम वोटर्स की संख्या महत्वपूर्ण है।
छपरा सीट का राजनीतिक माहौल
छपरा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का प्रभाव रहा है। वर्तमान में, इस सीट से डॉ. सीएन गुप्ता विधायक हैं, जो पिछले दो कार्यकाल से जीतते आ रहे हैं। लेकिन इस बार बीजेपी ने उनका टिकट काटकर छोटी कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। 2020 के चुनावों में, सीएन गुप्ता को 75,710 वोट मिले थे, जबकि आरजेडी के रणधीर कुमार सिंह को 68,939 वोट मिले थे, जो दर्शाता है कि दोनों के बीच मुकाबला काफी निकट था। खेसारी लाल यादव की स्थानीय लोकप्रियता भी चुनाव में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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