सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड के कोद टोला गांव में एक परिवार आज भी पक्के मकान के इंतजार में है। फागु हेंब्रम अपनी दूसरी पत्नी के साथ बांस, पत्तों, मिट्टी और प्लास्टिक से बनी झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं।
अस्थायी आवास में कठिनाई
फागु हेंब्रम का अस्थायी घर बांस और पत्तों से बनाया गया है, जिसकी दीवारों पर मिट्टी का लेप है और छत पर ताड़ के पत्ते और प्लास्टिक फैला हुआ है। इस झोपड़ी में रहने वाले परिवार को बरसात के दौरान बारिश और तेज हवा से बचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
आवास योजना की राशि का इंतजार
वार्ड सदस्य से जानकारी लेने पर पता चला कि फागु हेंब्रम के सभी जरूरी कागजात करीब सात महीने पहले जमा कर दिए गए थे। उन्हें बैंक जाकर अपने खाते की जांच कराने के लिए भी कहा गया था, लेकिन हेंब्रम के अनुसार, उनके खाते में अब तक आवास योजना की राशि नहीं आई है। वार्ड सदस्य ने बताया कि जब तक खाते में राशि नहीं आती, आवास निर्माण का काम शुरू करना संभव नहीं है। अब मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशि किस कारण से नहीं भेजी गई।
