रांची: केंद्र सरकार ने झारखंड को मिलने वाली 16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि के प्रभावी उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्य सरकार को ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। साथ ही, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में ग्राम पंचायतों की भागीदारी को मजबूत करने का सुझाव भी दिया गया है। इस आयोग के तहत झारखंड को मिलने वाले अनुदान का लगभग 4,200 करोड़ रुपये जलापूर्ति और स्वच्छता संबंधी कार्यों पर खर्च किया जाएगा। इस संदर्भ में मंत्रालय ने एक और दो सितंबर को सभी राज्यों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की थी।
4,200 करोड़ रुपये का बजट जलापूर्ति और स्वच्छता पर
वित्त विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 16वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को वर्ष 2026-31 के दौरान लगभग 14,231 करोड़ रुपये अनुदान मिलने की संभावना है। यह राशि टाइड और अन-टाइड श्रेणियों में विभाजित होगी। टाइड अनुदान का इस्तेमाल जल जीवन मिशन और स्वच्छता कार्यों के लिए किया जाएगा, जिसमें 60 प्रतिशत राशि, यानी 4,200 करोड़ रुपये से अधिक, जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल का पानी पहुंचाने और स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर खर्च होगा।
पंचायतों को जल प्रशासन में बढ़ने चाहिए जिम्मेदारियां
केंद्रीय मंत्रालय ने ग्रामीण जल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियों में वृद्धि करने पर जोर दिया है। मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि पंचायतें वार्षिक संचालन और रखरखाव की विस्तृत योजना तैयार करें। इसके अलावा, स्थानीय संसाधनों की व्यवस्था, जलापूर्ति सेवाओं का प्रबंधन, और विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत तैयार जलापूर्ति संरचनाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए।
