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क्षेत्रीय भाषाएँ: संरक्षण और विकास के लिए मोर्चा ने उठाई आवाज़—क्या मिलेंगे संवैधानिक अधिकार?
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क्षेत्रीय भाषाएँ: संरक्षण और विकास के लिए मोर्चा ने उठाई आवाज़—क्या मिलेंगे संवैधानिक अधिकार?

रांची: झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री श्री बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य की पहचान केवल भौगोलिक सीमाओं और खनिज संपदा तक सीमित नहीं है।

Aaditya Hriday • 3 नवंबर 2026पूरी ख़बर पढ़ें
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क्षेत्रीय भाषाएँ: संरक्षण और विकास के लिए मोर्चा ने उठाई आवाज़—क्या मिलेंगे संवैधानिक अधिकार? — मुख्य बिंदु

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    क्षेत्रीय भाषाएँ: संरक्षण और विकास के लिए मोर्चा ने उठाई आवाज़—क्या मिलेंगे संवैधानिक अधिकार?

    रांची: झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री श्री बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य की पहचान केवल भौगोलिक सीमाओं और खनिज संपदा तक सीमित नहीं है।

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    भाषा और संस्कृति का महत्व

    श्री तिर्की ने कहा कि किसी भी समाज की भाषा उसके पूर्वजों के ज्ञान और संस्कृति का संवाहक होती है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इतिहास और जीवन दर्शन को पहुंचाने का माध्यम है।

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    झारखंड की भाषाई विविधता

    उन्होंने बताया कि झारखंड में संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया जैसी अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं।

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    संवर्धन की आवश्यकता

    हालांकि, उन्होंने निराशा व्यक्त की कि इतनी समृद्ध भाषाई विरासत के बावजूद इन भाषाओं के विकास और शैक्षणिक विस्तार के लिए आवश्यक संस्थागत व्यवस्था नहीं बन पाई है।

प्रकाशित: 3 नवंबर 2026 • संपादकीय डेस्क: Aaditya Hriday

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