सिमडेगा: पुलिस संस्मरण दिवस पर उपायुक्त कंचन सिंह ने झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के संघर्षों को साझा किया। अपने फेसबुक पोस्ट में, उन्होंने पलामू में बिताए दिनों की याद ताजा करते हुए उस समय की चुनौतियों और बलिदानों का जिक्र किया।

पुलिसकर्मियों के संघर्ष की कहानी

कंचन सिंह ने बताया कि जब 2002 में झारखंड की स्थापना के बाद नक्सल समस्या अपने चरम पर थी, तब उन्होंने एक पुलिस अधिकारी को अपना जीवनसाथी चुना। उन्होंने कहा कि उन्हें इस जीवन के चुनौतियों का आभास था, लेकिन वास्तविकता का सामना करने के बाद उन्हें समझ आया कि कठिनाइयों को जानने और उन्हें जीने में कितना भिन्नता होता है।

परिवारों का बलिदान

कंचन ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के संघर्षों, भय और बलिदान की भावनात्मक तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि इस जीवन में अनेकों मुश्किलें हैं, लेकिन पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों को निभाने में हमेशा तत्पर रहते हैं। यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन वे हमेशा अपने परिवारों और समाज की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।