रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक वाहन मालिक का हाइवा ट्रक वापस करे और उसे तीन लाख रुपये का मुआवजा दे। यह आदेश चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने दिया। अदालत ने कहा कि वाहन की नीलामी उस समय की गई, जब पुनरीक्षण याचिका दायर करने की वैधानिक अवधि समाप्त नहीं हुई थी, जो कि कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
याचिकाकर्ता अशोक सिंह का हाइवा ट्रक वर्ष 2021 में अवैध कोयला परिवहन के आरोप में जब्त किया गया था। लातेहार उपायुक्त द्वारा जारी किए गए जब्ती आदेश के खिलाफ उन्होंने समय सीमा के भीतर पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसे मई 2025 में स्वीकार करते हुए अदालत ने वाहन को लौटाने का आदेश दिया। लेकिन तब तक प्रशासन ने मार्च 2023 में वाहन की नीलामी कर दी थी।
सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि नीलामी के खरीदार को राशि और ब्याज लौटाकर वाहन वापस ले लिया गया है और याचिकाकर्ता को वाहन लेने के लिए कहा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नीलामी से पहले वाहन मालिक को व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिया गया था, और केवल समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित करना पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने इसे संपत्ति के संवैधानिक अधिकार और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए वाहन लौटाने के साथ-साथ तीन लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया। अतिरिक्त मुआवजे के दावों के लिए अदालत ने दोनों पक्षों को सक्षम सिविल अदालत में जाने की स्वतंत्रता दी।
जेपीएससी 14वीं पीटी रद्द करने की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में बुधवार को आंशिक सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कट-ऑफ जारी करने, ओएमआर शीट अपलोड करने, परिणाम में अधिकारियों के हस्ताक्षर की कमी, और उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के चयन सहित कई अनियमितताओं का आरोप लगाया है। अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए गुरुवार की तिथि निर्धारित की है।
