जोहार लाइव ब्यूरो

रांची : झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने सोमवार को रांची में विधानसभा के सामने एक दिवसीय धरना आयोजित कर राज्य सरकार के समक्ष कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को प्रस्तुत किया। महासंघ ने इस धरने के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष को 25 सूत्री मांग-पत्र सौंपा, साथ ही अनुबंध, आउटसोर्सिंग और अन्य कर्मचारियों से संबंधित 10 सूत्री मांग-पत्र भी प्रस्तुत किया।

धरने की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने की। इस दौरान महासंघ के महासचिव भूषण कुमार ने बताया कि राज्य के कर्मचारियों, अनुबंधकर्मियों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सरकार को लगातार ज्ञापन और मांग-पत्र दिए जाते रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। महासंघ का आरोप है कि समस्याओं का समाधान मांगने वाले कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं, जबकि उनकी मूल समस्याओं पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।

दिसंबर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी

महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं की तो आने वाले दिसंबर में आंदोलन को और बढ़ाया जाएगा। महासंघ ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें निरंतर सरकार के सामने रखी जा रही हैं और मुख्य सचिव से भी वार्ता कर समाधान का अनुरोध किया गया है। लेकिन आश्वासन के बावजूद समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

धरने में महासंघ के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद सहित अनेक कर्मचारी नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अनुबंध और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की मांग

महासंघ ने सरकार से आउटसोर्सिंग एजेंसियों की व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों को सीधे अनुबंध पर रखने की मांग की है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी लंबे समय से अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके काम के अनुरूप वेतन और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है।

महासंघ के अनुसार, आउटसोर्सिंग एजेंसियां सरकार से पूरा वेतन लेती हैं, लेकिन कर्मचारियों को उसका केवल एक हिस्सा ही दिया जाता है। महासंघ ने इसे अन्यायपूर्ण व्यवस्था बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की है।

वेतन, प्रोन्नति और सेवा शर्तों को लेकर कई मांगें

मांग-पत्र में कर्मचारियों के वेतन और प्रोन्नति से संबंधित कई मुद्दे उठाए गए हैं। महासंघ ने सभी कर्मचारियों के वेतन एवं प्रोन्नति की विसंगतियों को दूर करने, एमएसीपी का लाभ, क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारियों को पांच दिनों के कार्यदिवस का लाभ तथा चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को न्यूनतम मूल वेतन में संशोधन जैसी मांगें रखी हैं।

इसके अतिरिक्त पंचायत सेवकों और अन्य कर्मचारियों से संबंधित सेवा शर्तों में सुधार, अनुबंध कर्मचारियों के लिए समान काम के बदले समान वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग भी की गई है।

अनुबंध कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग

महासंघ ने वर्षों से अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कई कर्मचारी लंबे समय से सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति का लाभ नहीं मिल रहा है।

मांग-पत्र में अनुबंध कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन, सेवा की अवधि के आधार पर लाभ और नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की मांग शामिल है। साथ ही राज्य में कार्यरत मानदेय एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन में भी वृद्धि की मांग की गई है।

महिला और शिक्षा कर्मियों के लिए भी मांगें

महासंघ ने महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश, मातृत्व अवकाश तथा कर्मचारियों के लिए समान अवधि के वार्षिक अवकाश की मांग की है। शिक्षा विभाग से जुड़ी मांगों में शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ देने तथा शिक्षकों और अन्य कर्मियों से जुड़ी सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने की बात कही गई है।

कर्मचारियों ने ईपीएफ से संबंधित समस्याओं के समाधान की भी मांग की है। इसके साथ ही बायोमेट्रिक उपस्थिति के नाम पर कर्मचारियों के कथित शोषण को रोकने और कार्यस्थलों पर बायोमेट्रिक डिवाइस की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग रखी गई।

सरकार को आंदोलन बढ़ने का संकेत

धरने में शामिल कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, समान काम के बदले समान वेतन, प्रोन्नति, अवकाश, ईपीएफ और कार्यस्थल की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

महासंघ ने सरकार से मांगों पर तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो दिसंबर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध निर्णय और उसका क्रियान्वयन आवश्यक है।