गुमला जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही का मामला

गुमला : गुमला जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसमें एक रिटायर्ड शिक्षक ने दो महीने तक नियमित वेतन प्राप्त किया। इस संदर्भ में हुई जांच में यह भी पता चला कि वेतन बिल कार्यालय के बजाय साइबर कैफे में तैयार किए जा रहे थे।

जांच समिति की रिपोर्ट

जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में पाया कि महाबीर साहू नामक शिक्षक ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी दो महीने तक वेतन प्राप्त किया। इस भुगतान के लिए प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी घनश्याम चौबे ने डीडीओ के रूप में हस्ताक्षर किए थे।

अनियमितताओं का खुलासा

जांच के दौरान शिक्षा विभाग में कई गंभीर अनियमितताओं का पता चला। विभाग में वेतन पंजी उपलब्ध नहीं थी, जिसमें शिक्षकों के वेतन और पद से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। इसके अलावा, रोकड़ बही भी सही तरीके से नहीं रखी जा रही थी। बकाया भुगतान से संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिलने पर समिति ने इसे संदिग्ध माना है। यह भी सामने आया कि शिक्षा विभाग और अन्य विभागों के कुछ डीडीओ अपने वेतन बिल साइबर कैफे में तैयार करवा रहे थे। इस सूचना के बाद प्रशासन ने ऐसे साइबर कैफे, विशेषकर सिस्टम एनालिसिस नामक स्थानों पर छापेमारी की योजना बनाई थी।

वायरल हुआ आधिकारिक पत्र

हालांकि, कार्रवाई से पहले ही छापेमारी से जुड़ा आधिकारिक पत्र वायरल हो गया, जिससे प्रशासन की योजना उजागर हो गई। इसके चलते प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। यह पूछा जा रहा है कि आखिर प्रशासन ने कार्रवाई से पहले ही इस मामले की जानकारी क्यों साझा की। फिलहाल, वित्त विभाग के निर्देश पर ट्रेजरी से वेतन मद में हुई निकासी की जांच जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।