झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच, शुक्रवार को राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के बीच वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ। इस बैठक में JPSC-JSSC Reform Manch और JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच (देवेंद्र गुट) के प्रतिनिधियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अपनी समस्याएं सरकार के समक्ष रखीं।

छात्रों की प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान, छात्र प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। इनमें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, JPSC और JSSC में संस्थागत सुधार, TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उससे संबंधित नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। छात्रों का कहना है कि सरकार को युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र ठोस निर्णय लेना चाहिए।

वार्ता का सकारात्मक माहौल

बैठक के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि यह वार्ता का प्रारंभिक चरण था और बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अगले दौर की बैठक में अन्य मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

प्रतिनिधियों का विवरण

JPSC-JSSC Reform Manch की ओर से रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह ने वार्ता में भाग लिया। वहीं, JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच (देवेंद्र गुट) के प्रतिनिधियों में रामवतार महतो, दीनबंधु मंडल, चंदन कुमार, रविशंकर, प्रेम कुमार, अमित कुमार और विमल कुमार शामिल थे।

सरकार का आश्वासन

सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, पहले दौर की वार्ता के बाद कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह ध्यान देने योग्य है कि JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में छात्र 25 जुलाई 2026 से आंदोलन कर रहे हैं। रांची से आरंभ हुआ यह आंदोलन अब राज्यभर में फैल चुका है। पहले दौर की वार्ता के बाद अब सभी की नजर अगली बैठक और सरकार के संभावित निर्णय पर टिकी हुई है।