मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र बंशीधर ब्रजवासी ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई
मिथिला विश्वविद्यालय से परास्नातक बंशीधर ब्रजवासी ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में शिक्षामित्र के रूप में की थी। अपने गांव के स्कूल में नियुक्त होने के बाद उन्होंने शिक्षामित्रों के नियमितीकरण एवं सेवा अवधि से जुड़े मुद्दों को उठाना शुरू किया।
शिक्षकों के अधिकारों के लिए उन्होंने 2006 में प्रारंभिक शिक्षक संघ का गठन किया और अनशन जैसे आंदोलन के जरिए अपनी आवाज उठाई। वर्ष 2024 में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ टकराव के बाद उनकी नौकरी चली गई, जिसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
बंशीधर ने नवंबर 2024 में तिरहुत स्नातक क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की और विधान परिषद पहुंचे। उनके हालिया चुनावी सफलता ने उनके राजनीतिक कद को और बढ़ा दिया है, जिससे वो क्षेत्र में एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं।
