रांची। झारखंड में चर्चित शराब घोटाले की जांच में एक बार फिर तेजी आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के आईटी प्रबंधक अमर कुमार मेहता को 7 अगस्त को पूछताछ के लिए समन भेजा है। इसके अलावा, पहले समन का पालन न करने वाले चार अन्य व्यक्तियों को 10 अगस्त को दोबारा तलब किया गया है। एसीबी का कहना है कि हाल की पूछताछ में कई नए तथ्य उजागर हुए हैं, जिनके आधार पर डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
एसीबी द्वारा पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, पूर्व संयुक्त आयुक्त गजेंद्र कुमार सिंह और JSBCL के पूर्व महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास से विस्तृत पूछताछ की गई है। इन बयानों के विश्लेषण से नए पहलू सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि अब दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य गवाहों के बयानों से की जाएगी।
आईटी प्रबंधक से पूछताछ के प्रमुख बिंदु
7 अगस्त को एसीबी ने JSBCL के आईटी प्रबंधक अमर कुमार मेहता को बुलाया है। उनसे Track & Trace प्रणाली, शराब आपूर्ति की डिजिटल ट्रैकिंग, सिस्टम लॉग, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, और डिजिटल निगरानी व्यवस्था से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर प्रश्न किए जाएंगे। जांच एजेंसी जानना चाहती है कि क्या शराब की आपूर्ति और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए गए डिजिटल सिस्टम में कोई गड़बड़ी या प्रक्रियागत अनियमितता हुई है।
दूसरी बार समन भेजे गए व्यक्तियों की सूची
एसीबी ने फ्लोरेंस हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. के निदेशक जतिन सहाय, विकास अग्रवाल, ए-टू-जेड इंफ्रा सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक मनोज तिवारी और अरुण गौर को 10 अगस्त को दोबारा पूछताछ के लिए समन भेजा है। पहले समन के बावजूद ये लोग उपस्थित नहीं हुए थे। अब उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और हाल में सामने आए तथ्यों के आधार पर इनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
शराब घोटाले का विवरण
यह मामला झारखंड की पूर्व उत्पाद नीति, शराब आपूर्ति व्यवस्था और JSBCL के संचालन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोप है कि तत्कालीन उत्पाद विभाग के कुछ अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर नियमों को दरकिनार करते हुए चहेती एजेंसियों को मैनपावर और अन्य सेवाओं के ठेके दिलाए। जांच में फर्जी बैंक गारंटी, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी शामिल हैं। एसीबी ने इस संबंध में 20 मई 2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी और तब से लगातार दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस मामले में एसीबी पूर्व उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, तत्कालीन उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, संयुक्त आयुक्त गजेंद्र कुमार सिंह और JSBCL के तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, निर्धारित समय सीमा में आरोपपत्र दाखिल न होने के कारण कई आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी। इसके बाद जांच में फिर से तेजी लाई गई है और अब पुराने बयानों, नए साक्ष्यों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।









