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हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस
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हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस

झारखंड राज्य के हजारीबाग में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक रामनवमी जुलूस अब केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गर्व का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है।

Pragya • 27 मार्च 2026पूरी ख़बर पढ़ें
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हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस — मुख्य बिंदु

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    हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस

    झारखंड राज्य के हजारीबाग में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक रामनवमी जुलूस अब केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गर्व का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है।

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    District News: क्या है पूरा मामला

    समय के साथ, यह छोटा सा आयोजन एक विशाल जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया है। इसके अनुशासन और भव्यता ने इसे देश-विदेश में एक विशेष पहचान दिलाई है।

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    1970 में ताशा पार्टी का शामिल होना

    यह जुलूस स्वतंत्रता से पहले शुरू हुआ और 1947 के बाद इसका स्वरूप बदल गया। इसे राम जन्मोत्सव के साथ विजय उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

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    150 से अधिक अखाड़ों की भागीदारी

    इस भव्य आयोजन में वर्तमान में 150 से अधिक अखाड़े भाग लेते हैं, जिनमें लगभग 100 अखाड़े हजारीबाग शहर से होते हैं।

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    इस परंपरा की एक विशेषता यह है

    इस परंपरा की एक विशेषता यह है कि जबकि देशभर में रामनवमी का जुलूस नवमी को होता है, हजारीबाग में इसे दशमी को मनाया जाता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 4 से 5 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।

प्रकाशित: 27 मार्च 2026 • संपादकीय डेस्क: Pragya

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