कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर दलबदल का आरोप

भोपाल: सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही सुनवाई कर चुके हैं, और मामला अब जबलपुर उच्च न्यायालय में लंबित है। कांग्रेस विधायक दल ने 27 अप्रैल को सरकार द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने और पार्टी के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया था, जिसमें निर्मला सप्रे को भी शामिल किया गया था।

महिला आरक्षण पर विशेष सत्र

भारत सरकार ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था। इसके साथ ही परिसीमन संशोधन विधेयक भी लाया जाना था, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक गिर गया। भाजपा ने इसे महिलाओं के अपमान से जोड़ा और सभी राज्यों में विशेष सत्र आयोजित करने के निर्देश जारी किए। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नारी शक्ति वंदन के तहत महिलाओं के विकास और सशक्तीकरण पर संकल्प प्रस्तुत किया।

व्हिप का उल्टा असर

कांग्रेस विधायक दल ने अशासकीय संकल्प का प्रस्ताव रखा, जिसमें लोकसभा की वर्तमान संख्या में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण देने की मांग की गई, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। मतदान की संभावना को देखते हुए सभी सदस्यों को व्हिप जारी किया गया, जिसमें निर्मला सप्रे भी शामिल थीं। इस स्थिति में उम्मीद थी कि वे पार्टी के पक्ष में मतदान नहीं करेंगी या अनुपस्थित रहेंगी, जो उनके दलबदल के आरोप को प्रमाणित कर सकता था। लेकिन यह दांव उलटा पड़ गया।

सप्रे ने अपनी स्थिति स्पष्ट की

सूत्रों के अनुसार, सप्रे ने इस व्हिप के जरिए यह साबित किया है कि वे कांग्रेस विधायक दल की सदस्य हैं और उन पर लगे दलबदल के आरोप निराधार हैं। उन्होंने विधानसभा सचिवालय को इसकी लिखित सूचना भी दे दी है।

बीना को जिला बनाने की मांग

विधायक सप्रे ने सागर में कहा कि वे उस व्यक्ति का समर्थन करेंगी जो बीना को जिला बनाएगा। उन्होंने उमंग सिंघार से 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए मदद मांगी है। सप्रे ने कहा कि वे कहां हैं, यह कोर्ट तय करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार उनके खिलाफ कोर्ट गए थे।

कांग्रेस का पलटवार

सप्रे के बयान पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सप्रे लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा कि यदि सप्रे भाजपा में जाना चाहती हैं तो उन्हें अपनी सीट छोड़कर फिर से चुनाव लड़ना चाहिए। उनके बीना को जिला बनाने और 300 करोड़ रुपये की मांग करने से राजनीतिक सौदेबाजी की बात साफ हो जाती है।