झारखंड में छात्रों के धरने पर प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारांडी ने बुधवार को एक वीडियो साझा करते हुए प्रशासन की एक रात की कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 6 बजे उठने के बाद जब उन्होंने अपने मोबाइल में देखा, तो भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय का ट्वीट नजर आया, जिसमें प्रशासन की रात के समय की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई थी। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे थे। उनके अनुसार, वहां सिटी एसपी, एसएसपी और डीसी समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे, जो धरने पर बैठे छात्रों को हटाने का प्रयास कर रहे थे।

बिजली काटने का आरोप

मारांडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने धरने के स्थल की बिजली काट दी थी। हालांकि, छात्रों ने तुरंत अपने साथियों और अन्य लोगों को बुला लिया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बावरी और भानु राज सिन्हा जैसे कई नेता भी रात में वहां पहुंचे। इसके बाद, पुलिस और प्रशासन धीरे-धीरे वहां से वापस लौट गए।

लोकतांत्रिक आंदोलन पर सरकार का दबाव

मारांडी ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलनों को भी सहन नहीं कर पा रही है। उनका कहना था कि छात्रों ने भूख हड़ताल और धरने पर शांतिपूर्वक बैठे हुए हैं, इसलिए उन्हें परेशान करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है, तो यह छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

CBI जांच की प्रमुख मांग

मारांडी ने छात्रों की मुख्य मांग CBI जांच को बताया। उनका कहना था कि राज्य सरकार जिस CID से जांच करा रही है, उस पर छात्रों और झारखंड की जनता का विश्वास नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि CGL परीक्षा मामले में पहले SIT बनाई गई थी, लेकिन बाद में पूरी जांच टीम बदल दी गई, जिससे जांच की दिशा प्रभावित हुई।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को CBI से जांच कराने के साथ-साथ हाई कोर्ट की निगरानी में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करना चाहिए। इससे जिन छात्रों के पास गड़बड़ी के सबूत हैं, वे अपनी बात रख सकेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को अपनी कार्रवाई पर विश्वास है, तो वह CBI जांच से क्यों परहेज कर रही है।

रात में की गई कार्रवाई पर आपत्ति

मारांडी ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को शांतिपूर्ण धरना और आंदोलन का पूरा अधिकार है। ऐसे में रात के समय बिजली काटना और छात्रों को हटाने का प्रयास करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का काम आंदोलन समाप्त करना नहीं, बल्कि वहां बैठे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।

आंदोलन फैलने की चेतावनी

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बलपूर्वक आंदोलन समाप्त करने की कोशिश की, तो इसकी चिंगारी पूरे झारखंड में फैल सकती है। छात्र राज्य के हर गांव और जिले से आते हैं, इसलिए यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को जिस तरह बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए, वैसा अनुशासित और विशाल आंदोलन पहले कभी नहीं देखा गया।

सरकार को नसीहत

मारांडी ने सरकार और जिला प्रशासन से अपील की कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को चुनौती देने के बजाय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। धरना स्थल पर बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं बनी रहें और किसी भी स्थिति में लाठीचार्ज या बल प्रयोग के जरिए आंदोलन समाप्त करने का प्रयास न किया जाए।