झारखंड सरकार का नया विश्वविद्यालय अधिनियम 2026

झारखंड सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिए ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026’ के तहत नई नियमावली तैयार की है। इस अधिनियम के लागू होने से प्रोफेसरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों, तबादलों और अन्य प्रबंधन मामलों पर राज्य सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण होगा। यह निर्णय मुख्य रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और शैक्षणिक ढांचे को अधिक जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति की नई व्यवस्था

सरकार अब प्रोफेसरों और कर्मचारियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग या उससे संबंधित कार्यालयों में स्थानांतरित कर सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें केंद्रीय या राज्य सरकार के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी प्रतिनियुक्त किया जा सकेगा। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पदों की संख्या और कर्मचारियों की सेवा शर्तों का निर्धारण भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

यदि किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद रिक्त है या कोई प्रोफेसर लंबे समय के अवकाश पर है, तो वहां अनुबंध के आधार पर “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस” की नियुक्ति की जाएगी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि संविदा या अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों को भविष्य में स्थायी नौकरी का अधिकार नहीं होगा।