कांग्रेस ने मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर हमला बोला
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर केवल दिखावा कर रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए। कांग्रेस का यह भी कहना है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में जो विधेयक पारित नहीं हो सका, वह असल में महिला आरक्षण विधेयक नहीं था, बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को 21 सितंबर, 2023 को संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था और यह अब संविधान का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक को अस्वीकार किया गया है।
प्रधानमंत्री के आंसू और कांग्रेस का आरोप
श्रीनेत ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि वे सिर्फ दिखावे के लिए आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक के पीछे छिप रहे हैं। उन्होंने एक कार्टून का उदाहरण दिया, जिसमें प्रधानमंत्री को आमों की टोकरी के साथ दिखाया गया है, जो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से मना कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री सच में गंभीर हैं, तो उन्हें मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में तत्काल महिलाओं के लिए आरक्षण देना चाहिए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर शर्तें लगा रही है और महिलाओं के आरक्षण में बाधा डाल रही है।
महिलाओं के मुद्दों पर माफी की मांग
श्रीनेत ने प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं से माफी मांगने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें मणिपुर में महिलाओं के साथ हुई घटनाओं के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अपमान को कोई नहीं भूलता। इस संबंध में, उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि लोकसभा में 240 सांसदों में केवल 31 महिलाएं हैं, जो 12 प्रतिशत से भी कम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में 1,654 विधायकों में केवल 164 महिलाएं हैं।
कांग्रेस का महिला आरक्षण का इतिहास
कांग्रेस ने महिला आरक्षण की अवधारणा को पहली बार 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में पेश किया था, जिसका विरोध भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने किया था। श्रीनेत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।
