झारखंड में पहला डॉल्फिन अभयारण्य जल्द ही होगा स्थापित

रांची: झारखंड राज्य जल्द ही अपने पहले डॉल्फिन अभयारण्य का स्वागत करने वाला है। साहिबगंज जिले के मसकलैया क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र को संरक्षित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस कदम से न केवल डॉल्फिन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इको-टूरिज्म में भी वृद्धि की संभावना है।

साहिबगंज में डॉल्फिन का ‘बेबी बूम’

हाल के दिनों में गंगा नदी में डॉल्फिन के कई छोटे बच्चों की sightings हुई हैं, जिनकी उम्र लगभग 2 से 3 महीने है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनका जन्म नवंबर और दिसंबर के बीच हुआ था। यह पहली बार स्पष्ट किया गया है कि गांगेय डॉल्फिन इसी समय प्रजनन करती हैं और उनकी गर्भावधि अवधि लगभग 11 महीने होती है। यह जानकारी डॉल्फिन के जीवन चक्र को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

10 किलोमीटर का क्षेत्र होगा संरक्षित, पर्यटन में होगी वृद्धि

मसकलैया क्षेत्र में गंगा के 10 किलोमीटर हिस्से को डॉल्फिन अभयारण्य के रूप में घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, साहिबगंज में 256 डॉल्फिन पाई गई थीं, जो कि देश में सबसे अधिक घनत्व में से एक मानी जाती है। यहाँ पर्यटकों के लिए एक नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

देशभर में डॉल्फिन की गणना फिर से शुरू

केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए डॉल्फिन की राष्ट्रीय गणना फिर से आरंभ की है। विशेषज्ञों की टीम उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सर्वेक्षण कर चुकी है और अब पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ रही है। पिछली गणना (2022-23) में पूरे देश में 6327 डॉल्फिन की पहचान की गई थी। गांगेय डॉल्फिन एक विशेष स्तनधारी प्राणी है, जो दृष्टिहीन होती है और शिकार के लिए ध्वनि का उपयोग करती है। इसे 2009 में भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था।