Earthquake के कारण कम से कम 126 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 180 से ज्यादा लोग घायल हैं. Nepal के साथ-साथ भूटान और भारत के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.

नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित शीजांग क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के भीतर 20 से अधिक भूकंप के झटके (Tibet Earthquake) आए हैं. 7 जनवरी की सुबह 6:35 बजे 7.1 तीव्रता का एक भयंकर भूकंप आया, जिसके बाद से क्षेत्र में लगातार झटके महसूस किए जा रहे हैं. हालांकि, हिमालय का पूरा क्षेत्र ही भूकंप के लिए संवेदनशील है, फिर भी इन झटकों की तीव्रता अधिक है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूकंप के झटकों के कारण कम से कम 126 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 180 से ज्यादा लोग घायल हैं. नेपाल के साथ-साथ भूटान और भारत के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.

क्षेत्र में बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है. 8 जनवरी की सुबह 6:58 बजे 4.0 तीव्रता का भूकंप आया. सबसे पहले झटके को छोड़कर, पिछले 24 घंटों में आए 20 से अधिक भूकंपों की तीव्रता 3.9 से 5.0 के बीच रही है. 

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NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये भूकंप ल्हासा ब्लॉक में दरार के कारण आया था. ये एक ऐसा क्षेत्र है जो महत्वपूर्ण टेक्टोनिक तनाव वाले क्षेत्र में है. टेक्टोनिक तनाव- टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण पृथ्वी पर लगाया गया फोर्स होता है. धरती के नीचे 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच चल रही टक्कर के कारण, ये क्षेत्र भूकंप के लिए संवेदनशील बन गया है. पिछले कुछ दशकों में तिब्बत में कई भूकंप आए हैं, जिनमें 1950 में आया 8.6 तीव्रता का भूकंप भी शामिल है.

2015 में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे. और 22,000 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

भविष्य में भी भूकंप का खतरा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वेस्टर्न हिमालय दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है. वैज्ञानिक लंबे समय से कह रहे हैं कि हिंदू कुश से अरुणाचल प्रदेश तक, 2500 किलोमीटर में फैले बड़े क्षेत्र में 8 से अधिक तीव्रता का बड़ा भूकंप आने वाला है. टेक्टोनिक प्लेटों के लगातार टकराने के कारण फॉल्टलाइन के साथ भारी मात्रा में ऊर्जा जमा होती है- जिसे केवल भूकंप के रूप में ही छोड़ा जा सकता है. पृथ्वी में पड़ी दरारों को फॉल्टलाइन कहते हैं.