जमशेदपुर में मोहर्रम की तैयारियां

जमशेदपुर में मोहर्रम का पर्व नजदीक आ गया है, जिसके चलते विभिन्न मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है। हजरत मोहम्मद मुस्तफा स के अहलेबैत के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोग मीटिंग कर रहे हैं। यहां एक दिलचस्प तथ्य है कि जमशेदपुर में शिया समुदाय की कोई कर्बला नहीं है, जबकि अहले सुन्नत समुदाय के पास दो कर्बला हैं। एक कर्बला बिष्टुपुर में है और दूसरी साकची में। शिया समुदाय 10 मोहर्रम को कर्बला में कोई भी मजलिस आयोजित नहीं करता, क्योंकि उनके पास कोई कर्बला नहीं है। इसके अलावा, जमशेदपुर एक ऐसा शहर है जहां शिया समुदाय ताजिया का जुलूस भी नहीं निकालता, जबकि अन्य शहरों में यह परंपरा सामान्य है।

कर्बला की कमी और समुदाय की चुनौतियां

जमशेदपुर में शिया समुदाय ने कभी कर्बला बनाने का प्रयास नहीं किया है। केवल मानगो को छोड़कर, साकची में हुसैनी मिशन के लिए इमामबारगाह उपलब्ध नहीं है। हर वर्ष, हुसैनी मिशन के अध्यक्ष को इमामबारगाह के लिए टाटा स्टील से 10-12 दिनों के लिए क्वार्टर लेना पड़ता है। शहर में इमामबारगाह की स्थापना के लिए कुछ प्रयास किए गए हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। जब टाटा स्टील मस्जिदों और सामुदायिक भवनों के लिए जमीन देने के लिए तैयार था, तब शिया समुदाय की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसका परिणाम अब समुदाय को भुगतना पड़ रहा है।

मुहर्रम के आयोजन का स्वरूप

हालांकि, सामान्यत: शिया समुदाय मुहर्रम के महीने में मजलिस आयोजित करता है, लेकिन 10 मुहर्रम को विशेष रूप से ताजिया का जुलूस नहीं निकलता। इस दिन, अलम का जुलूस सुबह 8 बजे साकची गोलचक्कर की ओर जाता है। दोपहर में हुसैनी मिशन के अस्थायी इमामबाड़े में अजादार एकत्र होते हैं, जहां ज्यारत-ए-आशूरा होती है और इसके बाद फाका शिकनी का आयोजन होता है।

अहले सुन्नत समुदाय की गतिविधियां

अहले सुन्नत समुदाय की बिष्टुपुर स्थित कर्बला में चांद रात से ही जिक्रे हुसैन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 10 मोहर्रम को, अहले सुन्नत समुदाय साकची में स्वर्णरेखा नदी किनारे टाटा स्टील के रिवर पंप हाउस परिसर में एकत्र होते हैं, जहां से वे कर्बला तक पहुंचते हैं।

कर्बला के निर्माण में संघर्ष

शोहदाए कर्बला फाउंडेशन ट्रस्ट के अब्बास अंसारी ने बताया कि बिष्टुपुर कर्बला स्थापित करने में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी थी। इसी प्रकार, साकची कर्बला के लिए भी अहले सुन्नत समुदाय के नेताओं ने कई संघर्ष किए हैं।

बिष्टुपुर कर्बला में आयोजन की योजना

बिष्टुपुर कर्बला में मुहर्रम का आयोजन करने के लिए अब्बास अंसारी के नेतृत्व में एक मीटिंग का आयोजन किया गया, जहां शांतिपूर्ण तरीके से मुहर्रम संपन्न कराने की रणनीति बनाई गई। चांद रात से ही अलम खड़े किए जाएंगे और अकीदतमंद ज्यारत के लिए आएंगे। इसके पश्चात, नजर और नियाज का सिलसिला 12 मुहर्रम तक जारी रहेगा, जिसमें मौलाना इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का जिक्र किया जाएगा।

परचम लगाने का कार्यक्रम

शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे धतकीडीह, साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, मानगो और बारीनगर में अहले सुन्नत समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व मनाया जाता है। इन क्षेत्रों के इमामबाड़ों में पांच मोहर्रम को परचम लगाए जाते हैं, जिसके बाद नजर और नियाज का सिलसिला शुरू होता है।