
‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में नया मोड़ आया
भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में से एक, मुग़ल-ए-आज़म , केवल अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी कई दिलचस्प कहानियों के लिए भी जानी जाती है।

भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में से एक, मुग़ल-ए-आज़म , केवल अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी कई दिलचस्प कहानियों के लिए भी जानी जाती है।
भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में से एक, मुग़ल-ए-आज़म , केवल अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी कई दिलचस्प कहानियों के लिए भी जानी जाती है।
हालांकि, जब टीम उस्ताद साहब के पास पहुंची, तो उन्होंने गाने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने इससे पहले कभी फिल्मी गाना नहीं गाया था और आगे भी ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था।
इस बीच, उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने मजाक में या परीक्षा के तौर पर एक फीस मांगी जो उस समय के सामान्य गायक की फीस से लगभग 50 गुना अधिक थी—करीब 25 हजार रुपये, जबकि उस दौर में गायक 400-500 रुपये लेते थे।
हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब रिकॉर्डिंग की बारी आई, तो उस्ताद साहब ने एक शर्त रखी कि वे तभी गाना गाएंगे जब उन्हें पूरा सीन दिखाया जाएगा। उस समय सीन पूरी तरह तैयार नहीं था।
सीन देखकर उस्ताद साहब प्रभावित हुए और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने के लिए हामी भर दी। उन्होंने इस गाने को तीन बार रिकॉर्ड किया ताकि सर्वश्रेष्ठ वर्जन को चुना जा सके।





