आर-पार के मूड में उपेंद्र कुशवाहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बोले
1994 में जो हिस्सा आपने लालू से मांगा था, वही मुझे भी चाहिए

पटना। जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लिया। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सीएम कहते हैं कि मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर उन्होंने बड़ी इज्जत दी है, लेकिन मैं मानता हूं कि मुझे झुनझुना पकड़ाया गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि मुझे सिर्फ पद दिया गया, कोई अधिकार नहीं मिला।

पटना में अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कुशवाहा ने कहा कि संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर मुझसे पार्टी ने कभी कोई राय नहीं ली। किसी चुनाव में उम्मीदवारी पर चर्चा तो बहुत दूर की बात है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर पार्टी ने मुझसे कभी नहीं पूछा कि किसे उम्मीदवार बनाएं। कई बार मैंने सामने से जाकर सुझाव दिया, लेकिन उसपर कभी ध्यान भी नहीं दिया गया।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार को अति-पिछड़ा समाज के लोगों पर विश्वास नहीं है। नीतीश कुमार कहते हैं कि मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दे दी, लेकिन पार्टी मुझसे कोई राय लेना भी जरूरी नहीं समझती, तो यह झुनझुना नहीं तो क्या है।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जब मैंने कहा कि पार्टी का हिस्सा लिए बिना मैं नहीं जाऊंगा, तो लोगों ने पूछा कि किस हिस्से की बात कर रहा हूं। तो मैं बताना चाहूंगा कि नीतीश कुमार ने 1994 में लालू यादव से जो हिस्सा मांगा था, वही हिस्सा मुझे भी चाहिए। बता दें कि 90 के दशक में लालू यादव बिहार के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे थे। उनके विरोध में दूर-दूर तक कोई नेता नहीं था।

12 फरवरी, 1994 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में कुर्मी चेतना महारैली हुई थी। पूर्व विधायक सतीश कुमार सिंह इसके आयोजक थे। इसमें सबसे प्रमुख थे नीतीश कुमार, जो रैली में शामिल नहीं होना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस रैली की अगुवाई की। नीतीश कुमार को इस बात का डर था कि इस रैली में शामिल होने के बाद उन पर एक खास जाति के नेता होने का ठप्पा न लग जाए।

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