महिला आरक्षण पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
नई दिल्ली। महिला आरक्षण से संबंधित विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर एक वकील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
वकील को ‘कारण बताओ’ नोटिस
इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। अदालत ने रोहिणी जिला न्यायालय के वकील विभास कुमार झा को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने उनसे पूछा कि उनके वकालत लाइसेंस को रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें पेशेवर गतिविधियों से क्यों नहीं रोका जाना चाहिए।
विवादित पोस्ट का विवरण
जानकारी के अनुसार, वकील का एक फेसबुक पोस्ट अब हटा दिया गया है, जिसमें उन्होंने बार एसोसिएशन और राज्य विधिज्ञ परिषदों में महिलाओं और कुछ वर्गों को 33% आरक्षण देने के अदालत के आदेश पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं।
सीजेआई की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान, सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यदि वकील अदालत के साथ सहयोग नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जा सकता है। इसके साथ ही, अगली सुनवाई में उन्हें अपनी कानून की डिग्री भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
महिला वकील पर हमले का मामला
अदालत ने एक अन्य गंभीर मामले में भी स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें वकील स्नेहा कालिता पर उनके पति द्वारा जानलेवा हमले का आरोप है। बताया गया कि 22 अप्रैल को दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में उनके पति ने धारदार हथियार से उन पर हमला किया।
घायल अवस्था में स्नेहा ने अपने परिवार और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आरोपी मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
इन दोनों मामलों में अदालत की सक्रियता यह दर्शाती है कि न्यायपालिका न केवल अदालत की गरिमा को लेकर सख्त है, बल्कि वकीलों के आचरण और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।
