पलामू: पलामू के डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया के पिता एवं वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय अनिल चौरसिया की 14वीं पुण्यतिथि मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शाहपुर-गढ़वा रोड पर स्थित किन्नी गांव में उनकी प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
जनप्रतिनिधियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
इस कार्यक्रम में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम, विधायक आलोक चौरसिया, विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता, मेयर अरुणा शंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने स्वर्गीय अनिल चौरसिया की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान क्षेत्र के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
भीषण गर्मी में भी उमड़ी लोगों की भीड़
भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धांजलि सभा में समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। उपस्थित लोगों ने अपने प्रिय नेता को याद करते हुए उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि अनिल चौरसिया हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहते थे।
गरीबों और दलितों के हक के लिए लड़ते रहे: रघुवर दास
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि अनिल चौरसिया गरीबों, दलितों और शोषितों के सशक्त प्रतिनिधि थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया। रघुवर दास ने यह भी कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ उनकी लोकप्रियता और जनता के बीच उनकी गहरी पकड़ का प्रमाण है। 16 जून 2012 का दिन पलामू के लिए दुखद था, क्योंकि उसी दिन अनिल चौरसिया का निधन हुआ था।
पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प
विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि उनके पिता ने गरीबों पर होने वाले अत्याचार और अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष किया। जनता ने उनके कार्यों को स्मरण करते हुए उन्हें तीन बार विधायक बनने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में जनहित के लिए किए जा रहे विकास कार्यों से कुछ लोग असंतुष्ट हैं, लेकिन वे जनता की सेवा में निरंतर लगे रहेंगे। आलोक चौरसिया ने कहा कि उनके पिता के अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
अंतिम जनसभा के बाद बिगड़ी थी तबीयत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि 14 जून 2012 को अनिल चौरसिया ने गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड के बोडरी गांव में भीषण गर्मी में अपनी अंतिम जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और 16 जून 2012 को उनका निधन हो गया। उनके निधन को 14 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं। श्रद्धांजलि सभा के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण भी किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लिया।
