सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील को दी राहत, CGST वसूली पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए केंद्रीय गुड्स एवं सर्विस टैक्स (CGST) विभाग द्वारा 890 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पी. एम. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। इससे पूर्व, झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील की याचिका को खारिज करते हुए उन्हें अपीलीय प्राधिकरण के पास जाने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ टाटा स्टील ने अपील दायर की है।

गड़बड़ी की पहचान कैसे हुई?

यह मामला वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के संदिग्ध लाभ उठाने और CGST की धारा 74 के उल्लंघन से संबंधित है। टाटा स्टील द्वारा प्रस्तुत GSTR-2A और GSTR-3B के विवरणों का ऑडिट किया गया, जिसमें ITC के गलत तरीके से लाभ लेने का मामला सामने आया। इस ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर CGST के सक्षम अधिकारी ने गलत तरीके से प्राप्त की गई ITC की वसूली के लिए एक नोटिस जारी किया था।

टाटा स्टील ने चुनौती दी

टाटा स्टील ने इस नोटिस के खिलाफ एडजुडिकेशन में अपील की, जिसमें CGST के संयुक्त आयुक्त के समक्ष सुनवाई हुई। दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद, इसे CGST की धारा 74 का उल्लंघन मानते हुए 890 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया गया।

हाईकोर्ट में टाटा स्टील की दलीलें

टाटा स्टील ने एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में दो मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया। पहला, यह मामला CGST की धारा 74 से संबंधित नहीं है, और दूसरा, क्षेत्राधिकार और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। टाटा स्टील ने कहा कि कुछ शर्तों को एक साथ पूरा करने पर ही CGST की धारा 74 का मामला बनता है, और उनका मामला इन शर्तों को पूरा नहीं करता। इसके अलावा, संयुक्त आयुक्त ने धारा 50 के तहत दंड की वसूली का आदेश भी दिया था। 26 दिसंबर 2025 को दिए गए इस आदेश के खिलाफ टाटा स्टील ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो खारिज होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है।