चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जवान की मलेरिया से मौत

चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान जवानों को नक्सलियों से ही नहीं, बल्कि मच्छरों से भी खतरा महसूस हो रहा है। असम के एक जवान की मलेरिया के कारण मौत हो गई, जो अभियान में शामिल थे। उन्हें बीमारी के बाद रांची में इलाज के लिए भेजा गया था, जहां अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

मृत जवान की पहचान और स्वास्थ्य समस्याएं

मृत जवान का नाम के. आनंद सिंह है, जो सारंडा में नक्सल विरोधी गतिविधियों में तैनात थे। उन्हें तेज बुखार के चलते प्राथमिक जांच में मलेरिया की पुष्टि हुई। जैसे ही उनकी स्थिति बिगड़ी, उन्हें एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया। वहां इलाज के दौरान मलेरिया के कारण उनके मल्टीपल ऑर्गन फेल हो गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

सारंडा की स्थिति और मच्छर जनित बीमारियां

सारंडा क्षेत्र मलेरिया के लिए जाना जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सल अभियान के दौरान जवानों को नक्सलियों के अलावा बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बाद जंगलों में मच्छरों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे मच्छर जनित बीमारियों, विशेषकर मलेरिया और डेंगू, का खतरा बढ़ गया है। लगातार गश्त और कठिन इलाकों में रहने के कारण जवान संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।

शोक और स्वास्थ्य सुरक्षा के कदम

जवान की मौत की सूचना से बटालियन और पुलिस महकमे में शोक की लहर है। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर गहरा दुख व्यक्त किया है। जवान का पार्थिव शरीर सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव असम भेजा जा रहा है। इसके अलावा, अभियान में शामिल अन्य जवानों की स्वास्थ्य जांच के निर्देश जारी किए गए हैं। जवानों को मच्छरदानी, कीटनाशक और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि नक्सलियों से मुकाबले के साथ-साथ जवानों की स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्राथमिकता है।