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पलामू में हुई थी सत्यजीत रे की फिल्म की शूटिंग
सत्यजीत रे की प्रसिद्ध फिल्म “Days and Night in the Forest” ने पलामू में अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए जगह बनाई। यह फिल्म संताली संस्कृति की पहली बार झलक प्रस्तुत करती है। इसे 16 जनवरी 1970 को प्रदर्शित किया गया था, और अब 56 वर्ष बाद इसे JANUS FILMS ने 27 फरवरी को 4K प्रारूप में जारी किया है।
पलामू की फिल्म दुनिया भर में छाई
इस फिल्म की प्रशंसा न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे प्रमुख प्रकाशनों में की गई है। झारखंड में फिल्माई गई इस कहानी ने पलामू की पहचान को एक नई ऊंचाई दी है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकारें प्रयासरत हैं, लेकिन अपने समृद्ध इतिहास के साथ जुड़ना भी महत्वपूर्ण है।
सुनील गंगोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित
यह फिल्म सुनील गंगोपाध्याय के 1968 में प्रकाशित उपन्यास पर आधारित है। “Days and Night in the Forest” आधुनिक संबंधों की जटिलताओं को दर्शाती है, जिसमें लोककथाओं की गूंज भी शामिल है।
शर्मिला टैगौर और सिमी ग्रेवाल थीं एक्टर
पलामू के ग्रामीण परिवेश में चार दोस्त—अशीम, संजय, हरी और शेखर—अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से भागकर आते हैं। वे एक चौकीदार को रिश्वत देकर जंगल में बने एक अतिथि गृह में ठहरते हैं। हालांकि शुरुआत में उनके इरादे स्पष्ट होते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों से जुड़ने के बाद उनकी भावनात्मक जटिलताएं बढ़ती हैं।
सत्यजीत रे की संवेदनशील फिल्म
सत्यजीत रे का निर्देशन करियर विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों से भरा हुआ है। “Days and Night in the Forest” उन्होंने ऐसे समय में बनाई जब वे संवेदनशील और यथार्थवादी फिल्मों का निर्माण करते थे। इस फिल्म में उन्होंने चार बेरोजगार युवकों की कहानी को चित्रित किया है, जो पलामू आते हैं, और उनके जीवन को नए रूप में प्रस्तुत करते हैं।
Days and Night in the Forest 4K में रिलीज
यह फिल्म भारतीय शहर के युवाओं की अकेली जीवन जीने की परिस्थिति को दर्शाती है और इसे पश्चिमी समीक्षकों ने विशेष सराहना दी है। इसे “यूरोपीय दृष्टिकोण” वाली फिल्म कहा गया है, जिसमें जटिल पात्रों और उनकी भावनाओं का गहन चित्रण किया गया है।
मुख्य कलाकार:
- अशीम – सौमित्र चटर्जी
- संजय – शुभेंदु चटर्जी
- हरी – समित भंजा
- शेखर – रवि घोष
- अपर्णा – शर्मिला टैगोर
- जया – काबेरी बोस
- दुली – सिमी गरेवाल
सत्यजीत रे की इस फिल्म ने अपने समय में विश्व स्तर पर एक खासी पहचान बनाई थी, विशेषकर अमेरिका और यूरोप में।
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