नशे की आगोश में रांची

रांची। नशे के सौदागर हमारे शहर को बर्बाद करने में जुटे हैं और हम आज की युवाओं को नशे की लत में डूबते देख रहे हैं।रांची ऐसा शहर जहां हर प्रकार के नशे का समान मिल जायेगा। 15 वर्ष से 25 वर्ष के युवा। अधिकांश युवा चालक हैं या तो छात्र हैं या फिर बेरोजगार। सर्वे के अनुसार एक हजार में 25 युवा इसके धीरे-धीरे शिकार बनते जा रहे हैं। पढ़ाई छूटती जा रही है। नशे के सेवन के बाद अगल ही दुनिया चले जाते हैं। यूं कहिए अपना संसार ही बना लेते हैं। एक ड्रग्स एडिकटेड ने बताया सेवन के बाद इस दुनिया से कोई मतलब नहीं रहता है। चार पांच घंटे के लिए जैसे स्वर्ग में तैरते हैं। दुनिया समाज में क्या हो रहा है, इससे दूर नशे की दुनिया होती है। कोई मना करने पर काफी गुस्सा आता है। 100 करोड़ है करोबार रांची में : रांची में सौ करोड़ से अधिक के नशे के व्यापार होते हैं। नशे के सौदागर स्कूल, कॉलेज, हॉस्टेल्स, चौके चौराहे में माल बेचते दिख जायेंगे, लेकिन व्यापार उन्हीं से किया जाता है, जो उसके पुराने ग्राहक होते हैं। पांच ग्राम हेरोइन का दाम 500 से दो हजार रुपये होते हैं। नाक से सांस द्वाया या फिर धुएं के माध्यम से इसका सेवन करते हैं। एक दो बार जब एक युवा इसके शिकार हो जाते हैं। फिर इसकी लत लग जाती है।

एक सर्वे से पता चला है कि देश में नशा करने वालों की संख्या 37 करोड़ के पार चली गई है। यह संख्या दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश अमेरिका से अधिक है। इनके साथ ही, नशे करने वालों में शराब पीने वालों की संख्या 16 करोड़ तक पहुंच गई है, जो रूस की आबादी के बराबर है। 17 साल से कम उम्र के 20 लाख प्रभावित हैं ये सर्वे समाज कल्याण एवं सशक्तिकरण मंत्रालय ने एम्स के नेशनल ड्रग्स डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के जरिए कराया है। सर्वे के मुताबिक 17 साल से कम उम्र के 20 लाख बच्चे गांजे की लत का शिकार हैं। सर्वे के मुताबिक, शराब पीने वालों में 19 प्रतिशत (लगभग 3 करोड़) ऐसे हैं जो शराब के बिना रह नहीं पाते। 2.26 करोड़ लोग यानी कुल आबादी का 2.1 प्रतिशत अफीम, इसके डोडे, हेरोइन, स्मैक और ब्राउन शुगर जैसी ड्रग्स के शिकंजे में हैं।

नेपाल, बांग्लादेश के माध्यम से यहां पहुंचते हैं ड्रग्स

कई देशों के गुप्त मार्ग से ड्रग्स पहुंचते यहां। झारखंड में नेपाल, बांग्ला देश के माध्यम से ड्रग्स यहां पहुंचते हैं। कोलकता, उडीसा से यहां आसानी से धंधेबाज नशे का व्यापार करते हैं। नेपाल, म्यांमार के रूट से गांजा, हशीश अफीम की तस्करी होती है।

17 साल से कम उम्र के 20 लाख बच्चे गांजेकी लत का शिकार : 10 से 17 साल के बच्चों में बढ़ रहा नशे का चलन है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार 10 से 17 साल की आयु के बच्चों में अफीम, गांजा और इनहेलेंट्रस का चलन बढ़ रहा है। नशे के व्यापार में झारखंड भी शामिल है। सबसे अधिक प्रभावित राज्य आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ, गुजरात, हरियाणा, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र, एनसीटी दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं। नशा मुक्ति का बजट खर्च ही नहीं हो सका : नशा मुक्ति के लिए बजट प्रावधान भी है, लेकिन पूरी राशि खर्च नहीं हो पाती है। 260 करोड़ का बजट रखा था। समाज कल्याण विभाग मात्र 90.93 करोड़ ही खर्च किया जा सका।

Brown Sugar , गांजा, अफीम का व्यापार

राजधानी रांची में नशे का कारोबार काफी तेजी से बढ़ रहा है। इनमें ड्राइ नशा का चलन अधिक है। ब्राउन सुगर, गांजा, अफीम के साथ नशे की इंजेक्शन कि लत नवयुवकों में अधिक है। सूत्रों की मानें, तो इस धंधे में वैसे लोगों ने अपना पैसा लगा रखा है, जो पूर्व में गांजा बेचने और मटका खेलाने का काम करते हुए आगे बढ़ा है। और अब वे ब्राउन सुगर में धंधेबाज पैसा लगा रहे हैं। रांची में अफीम, ब्राउन सुगर तथा गांजा बरही मार्ग से पहुंच रहा है। एक ग्राम ब्राउन शुगर की कीमत 500 से 2000 रुपये तक भुगतान करने पड़ते हैं।

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