📌 गांडीव लाइव डेस्क:

ठाकुरगांव का 300 साल पुराना भवानी-शंकर मंदिर: आस्था और रहस्य का प्रतीक ✨

रांची के ठाकुरगांव में स्थित भवानी-शंकर मंदिर, आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है। यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहाँ स्थापित अष्टधातु से बनी ‘भवानी-शंकर’ की प्रतिमाएँ अत्यधिक दुर्लभ मानी जाती हैं, लेकिन भक्तों के लिए इनका दर्शन वर्जित है।

गर्भगृह में प्रवेश केवल पुजारी और राजपरिवार के सदस्यों के लिए 🚪

मंदिर की खासियत यह है कि गर्भगृह में केवल मंदिर के पुजारी और ठाकुरगांव के शाहदेव राजपरिवार के सदस्य ही जा सकते हैं। आम भक्त मंदिर के प्रांगण में बैठकर पूजा करते हैं और पुजारियों को चुनरी, पुष्प और प्रसाद अर्पित करते हैं। शाहदेव राजपरिवार के वंशज जयकुमार नाथ शाहदेव का कहना है कि यहां माँ भवानी का साक्षात रूप विद्यमान है।

पूजा की रहस्यमय प्रक्रिया 🌌

नवरात्र के दौरान, पूजा की प्रक्रिया रहस्यमय होती है। पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर भवानी-शंकर की प्रतिमा का अभिषेक करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

संधि बलि और दशहरे का मेला 🎉

नवरात्र की अष्टमी तिथि पर संधि बलि की विशेष परंपरा का आयोजन किया जाता है। नवमी के दिन बकरों और एक भैंसे की बलि दी जाती है। यह रिवाज सदियों पुराना है और केवल राजपरिवार की अनुमति से ही संपन्न होता है। नवरात्र और विजयादशमी के दिन मंदिर के आसपास मेला भी लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

मंदिर का ऐतिहासिक सफर 📜

भवानी-शंकर मंदिर का इतिहास भी काफी रोचक है। कहा जाता है कि 1543 में नवरत्नगढ़ के महाराज रघुनाथ शाहदेव के बेटे यदुनाथ शाहदेव की बारात बक्सर जा रही थी। इसी दौरान उन्हें नदी के किनारे दिव्य चिंतामणि रत्न और भवानी-शंकर की प्रतिमाएं मिलीं। बाद में यदुनाथ शाहदेव के पुत्र, कुंवर गोकुल नाथ शाहदेव ने इन प्रतिमाओं की पूजा शुरू की और इस प्रकार मंदिर की स्थापना हुई।

भवानी-शंकर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जो सदियों से भक्तों को आकर्षित कर रहा है।