हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम एवं आरआरडीए को लगायी फटकार, कहा
रांची। डॉ राजेश कुमार के नक्शा विचलन मामले में दायर नक्शा स्वीकृति से संबंधित राधिका शाहदेव एवं लाल चिंतामणि नाथ शाहदेव की हस्तक्षेप याचिका पर आज हाइकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश के आलोक में नगर विकास विभाग के टाउन प्लानर गजानंद राम कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे राज्य में टाउन प्लानर की स्थिति के बारे में पूछा। जिसके बाद कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताने को कहा है कि राज्य में टाउन प्लानर के कितने पद स्वीकृत हैं और पूरे राज्य में टाउन प्लानर की कितनी आवश्यकता है। पदों को भरने के लिए क्या कार्यवाही की गयी है। मामले की सुनवाई हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने मामले में रांची नगर निगम और रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार में स्वीकृत पदों पर नियुक्ति के बारे में पूछा था। जिस पर गजानंद राम की ओर से कहा गया था कि रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार में स्वीकृत पद पर नियुक्ति नहीं हुई है। कॉन्टैक्ट बेसिस पर काम चल रहा है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए रांची नगर निगम एवं आरआरडीए को कड़ी फटकार लगायी थी। कोर्ट ने कहा था कि रांची नगर निगम में 20 वर्षों से कोई नियुक्ति नहीं हुई है। राज्य सरकार के दूसरे विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर/ एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जैसे पदों पर नियुक्त किये गये अधिकारियों को रांची नगर निगम और आरआरडीए में प्रतिनियुक्ति पर रखा गया है। ये अधिकारी टाउन प्लानर की अहर्ता भी नहीं रखते हैं। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से लाल ज्ञानरंजन नाथ शाहदेव ने पैरवी की।
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