रांची: झारखंड पुलिस मानव तस्करी को रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठा रही है। पुलिस ने एक ठोस रणनीति तैयार की है, जिससे लापता बच्चों के मामलों की रोकथाम और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस संदर्भ में, झारखंड पुलिस ने सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर आवश्यक जानकारी एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
पुलिस इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है। सीआईडी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पूर्वी क्षेत्र की एक जोनल कंसल्टेशन बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति द्वारा बुलाई गई है, जिसका उद्देश्य मानव तस्करी और लापता बच्चों के मामलों के लिए पूरे देश में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना है।
मानव तस्करी विरोधी इकाई से जानकारी की मांग
सीआईडी ने सभी जिलों से मानव तस्करी विरोधी इकाई (AHTU) की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। जिलों को यूनिट में तैनात निरीक्षकों, अवर निरीक्षकों और कांस्टेबलों की संख्या, 2024, 2025 और मई 2026 तक दर्ज मानव तस्करी के मामलों का ब्योरा, एवं बरामद किए गए बच्चों की संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, जिलों से मानव तस्करी की रोकथाम के लिए अपनाई गई नवाचारात्मक पहलों, प्रभावी कार्यप्रणालियों, AHTU को सुदृढ़ बनाने के सुझाव, और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों की जानकारी भी मांगी गई है।
सीआईडी का मानना है कि जिलों से प्राप्त सुझाव और आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर तैयार की जाने वाली SOP को और अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने में सहायक होंगे, जिससे मानव तस्करी और लापता बच्चों के मामलों में त्वरित कार्रवाई, बेहतर समन्वय, और पीड़ितों के शीघ्र बचाव एवं पुनर्वास के लिए एक समान व्यवस्था विकसित की जा सके।
झारखंड में मानव तस्करी एक गंभीर समस्या है। तस्कर यहां से बच्चों और महिलाओं को काम दिलाने के नाम पर अन्य राज्यों में ले जाते हैं, जहां उनका शोषण किया जाता है और उन्हें बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार सहना पड़ता है।
