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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
कैरव गांधी का अपहरण: नौ दिन बाद भी सुराग नहीं मिला
उद्योगपति कैरव गांधी के अपहरण की घटना को अब नौ दिन हो चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अपहृत कैरव गांधी का कोई पता नहीं चला है और न ही अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है।
स्कॉर्पियो की जांच बिहार में
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि अपहरण के लिए इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी बिहार के नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र के निवासी राजशेखर के नाम पर दर्ज है। जब पुलिस की टीम इनसे मिलने नालंदा पहुंची, तब तक आरोपी वहाँ से फरार हो चुका था।
नालंदा पुलिस के साथ मिलकर, पुलिस ने राजशेखर के घर पर कई बार छापेमारी की, पर हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। यह स्पष्ट है कि आरोपी अपनी स्कॉर्पियो के साथ न केवल भागने में सफल रहा बल्कि पुलिस के लिए चुनौती भी खड़ी कर दी है।
महिला मित्र से पूछताछ
इस मामले की जांच के दौरान सोनारी थाना क्षेत्र में कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी पूछताछ की गई। फिर भी, यहाँ से भी पुलिस को कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं हुई। 13 जनवरी को सर्किट हाउस इलाके में हुई इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
आरोपी का आपराधिक प्रोफाइल
राजशेखर के पिता उपेंद्र सिंह स्थानीय ‘मारवाड़ी बासा’ होटल के मालिक हैं। राजशेखर पूर्व में नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में एक कंप्यूटर कोचिंग सेंटर संचालित करता था, जिसे विवादों के चलते बंद कर दिया गया था। नई पोखर क्षेत्र को साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता है।
हालांकि सुरक्षा तंत्र चौकस है और लगातार छापेमारी चल रही है, फिर भी आरोपी का फरार होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने जल्द खुलासे के दावे किए हैं, लेकिन 192 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है।
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