उद्योगों के जमीन की तलाश में जियाडा, जिलों से मांगी गयी जानकारी
रांची, देवीपूर, धनबाद, बोकारो इंडस्ट्रीयल एरिया पर बल

रांची। राज्य में बड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये पिछले कुछ सालों में कई पॉलिसी सरकार ने लायी। वहीं, राज्य में आने वाले उद्योगों के लिये सबसे बड़ी समस्या जमीन है। उद्योग विभाग और जियाडा भी लगातार जमीन के मामले में काम कर रहा है। पिछले कुछ दिनों से जियाडा की ओर से राज्य भर में इंडस्ट्रीयल एरिया बसाने के लिये जमीन की तलाश की जा रही है।

इसमें विषेश रूप से रांची, देवीपूर, धनबाद, बोकारो आदि इलाकों में कोशिश की जा रही है। उद्योग विभाग के आदेश पर जियाडा भी जिला प्रशासन से इस मामले में संपर्क कर रहा है। जहां अलग अलग जिलों में जमीन चिन्हित किया जा रहा है। हालांकि कुछ जिलों ने जियाडा के पास जमीन की जानकारी भेजी है, जिस पर विभाग कार्य कर रहा है।

उद्योग विभाग की मानें तो देवघर स्थित देवीपुर इंडस्ट्रीयल एरिया में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साल 2017 में क्षेत्र में 82 प्लॉट्स नीलाम किया गया था। जिस पर अब तक उद्यमियों का अधिकार नहीं हो पाया है। हालांकि यहां उद्यमियों को अधिकार दिलाने के लिये जियाडा से लेकर स्थानीय प्रशासन तक ने प्रयास किया।

लेकिन स्थानीय विवाद के लिये इस पर अधिकार नहीं हो पाया है। ऐसे में नये जमीन चिन्हित कर उद्यमियों को जमीन पर अधिकार दिलाने की कोशिश की जायेगी। जानकारी हो कि देवीपुर में उद्यमियों को जमीन में अधिकार नहीं मिल पाने के कारण कई उद्यमियों ने अन्य राज्यों में उद्योग स्थापित किया।


उद्योग स्थापित होने से राज्य में रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। पिछले दिनों देवीपुर में उद्योग विभाग की ओर से 111 प्लॉट्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गयी। इस दौरान विभाग ने दो बार अखबारो के माध्यम से विज्ञापन दिया। लेकिन विभाग को प्लॉट्स के अनुसार आवेदनों की प्राप्ति नहीं हुई। विभाग की मानें तो पहले सिंतबर माह में विज्ञापन जारी किया।

जिससे विभाग को 40 आवेदन मिलें। जिसमें से विभाग ने 35 आवेदन सही पाया। जबकि दूसरा विज्ञापन दिंसबर महीने में जारी किया गया। जिससे विभाग को 36 आवेदन मिलें। ऐसे में बार बार उद्यमियों की ओर से रूझान नहीं आने से विभाग को नीलामी में सफलता नहीं मिल रही है। अब विभाग आने वाले दो महीने के अंदर क्षेत्र की नीलामी प्रक्रिया पूरी करने पर प्रयासरत है। देवीपुर में उद्यमियों की रूचि नहीं होने का प्रमुख कारण भूखं डमें अधिकार नहीं हो पाना है।

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