नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंध हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं, चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या अन्य खेल। इन दोनों चिर प्रतिद्वंद्वियों के बीच मुकाबले का फैंस को हमेशा इंतजार रहता है, लेकिन हाल के वर्षों में इन संबंधों में संवेदनशीलता बनी हुई है। इस पर अब सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है, जो खेल प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह निर्धारित होता है कि दोनों देशों के खिलाड़ी कब और किन परिस्थितियों में एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगे।

बुधवार को खेल मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल आयोजनों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा। इसका अर्थ है कि न तो भारतीय टीम पाकिस्तान जाकर कोई श्रृंखला खेलेगी और न ही पाकिस्तानी टीम को भारत में द्विपक्षीय मुकाबलों के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह निर्देश सभी राष्ट्रीय खेल संघों, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण को जारी किया गया है।

द्विपक्षीय सीरीज पर पूरी तरह रोक

सरकार के निर्देशों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय प्रतियोगिता फिलहाल संभव नहीं है। इसका मतलब यह है कि क्रिकेट, हॉकी या अन्य खेलों में दोनों देशों के बीच कोई भी द्विपक्षीय श्रृंखला आयोजित नहीं की जाएगी।

बहुपक्षीय आयोजनों में छूट

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के मामले में सरकार का रुख अलग है। यदि कोई बहुपक्षीय प्रतियोगिता होती है, जिसमें कई देश शामिल होते हैं, तो इसमें भारत और पाकिस्तान दोनों भाग ले सकते हैं। यानी ओलंपिक, एशियन गेम्स या विश्व कप जैसे आयोजनों में दोनों टीमें आमने-सामने आ सकती हैं।

नीति के पीछे की पृष्ठभूमि

यह नीति पहली बार अगस्त 2025 में सामने आई थी, जब एशिया कप में भारत की भागीदारी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। उस समय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया था कि वह बहुपक्षीय आयोजनों में दखल नहीं देंगे, बशर्ते मेजबानी पाकिस्तान के पास न हो।

वैश्विक आयोजनों की मेजबानी पर फोकस

भारत आने वाले वर्षों में कई बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी करना चाहता है, जैसे राष्ट्रमंडल खेल 2030 और ओलंपिक खेल 2036। इस संदर्भ में, सरकार अंतरराष्ट्रीय मानकों और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सिद्धांतों के अनुसार समावेशिता बनाए रखना चाहती है।

वीजा प्रक्रिया होगी आसान

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के अधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों के पदाधिकारियों को पांच साल तक के लिए मल्टीपल एंट्री वीजा देने की योजना है, ताकि भारत को एक भरोसेमंद और सुविधाजनक खेल मेजबान के रूप में स्थापित किया जा सके।