डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में शैक्षणिक अराजकता
रांची कॉलेज से विकसित होकर बने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर असंतुलन देखा जा रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट ने शिक्षक और छात्रों के बीच की असमानता को उजागर किया है, जो झारखंड की उच्च शिक्षा प्रणाली की समस्याओं को दर्शाती है।
छात्रों की संख्या और शिक्षकों के पद
रिपोर्ट के अनुसार, ओड़िया और बांग्ला विभागों में छात्रों की संख्या बहुत कम है, फिर भी यहां स्थायी शिक्षकों की संख्या अधिक है। बांग्ला विषय में स्नातक (यूजी) स्तर पर कोई भी छात्र नहीं है, जबकि स्नातकोत्तर (पीजी) में केवल एक विद्यार्थी नामांकित है। इसके बावजूद, इस विभाग में चार शिक्षकीय पद स्वीकृत हैं, जिसमें दो असिस्टेंट प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर और एक प्रोफेसर शामिल हैं। इसी प्रकार, ओड़िया विभाग में भी स्थिति कुछ वैसी ही है, जहां यूजी में केवल एक और पीजी में तीन छात्र हैं, फिर भी यहां चार शिक्षकीय पद मौजूद हैं।
प्रोफेशनल कोर्सेज की स्थिति
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में यूजी के 462 और पीजी के 92 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कंप्यूटर एप्लिकेशन में यूजी के 243 और पीजी के 144 विद्यार्थी हैं। इसके बावजूद, इन विभागों में शिक्षकों के पद न तो स्वीकृत हैं और न ही सृजित। विश्वविद्यालय के भविष्य के कोर्स जैसे BBA, MBA, और MCA, पूरी तरह से गेस्ट फैकल्टी पर निर्भर हैं। राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, कई नए विषयों के लिए अब तक शिक्षकों के पदों का सृजन नहीं किया गया है, जिससे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
