दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंटरनेट और मोबाइल ऐप्स पर बढ़ते अश्लील तथा गैरकानूनी कंटेंट के प्रति सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने Google और Apple को निर्देश दिया है कि वे उन मोबाइल ऐप्स के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें जो पोर्नोग्राफी, अपराध या अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेक प्लेटफॉर्म्स को केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय ऐप्स को अनुमति देने से पहले अधिक सतर्कता बरतनी होगी।
जनहित याचिका के बाद कोर्ट की सख्ती
यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत में लाया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कई मोबाइल ऐप्स खुलेआम अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे युवाओं पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पहुंच बहुत व्यापक है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही अधिक होनी चाहिए।
ऐप्स को मंजूरी देने से पहले करनी होगी जांच
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स जैसे Google Play Store और Apple App Store को ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से पूर्व जरूरी जांच करनी चाहिए।
अदालत के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत इन कंपनियों की जिम्मेदारी केवल शिकायतों पर कार्रवाई करना नहीं है। उन्हें पहले से सतर्क रहकर उन ऐप्स की पहचान करनी चाहिए जो कानून और नैतिक मानकों का उल्लंघन करते हैं।
युवाओं पर असर को लेकर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे ऐप्स का सबसे अधिक प्रभाव देश की युवा पीढ़ी पर होता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी को इस तरह के कंटेंट के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता।
अदालत ने जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम 2021 का पूरी तरह पालन करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर अवैध या आपत्तिजनक ऐप्स आसानी से उपलब्ध न हों।
CERT-In को भी दिए गए निर्देश
कोर्ट ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) को भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि Google, Apple और CERT-In मिलकर ऐसे कंटेंट की निगरानी करें और उसकी पहुंच को तुरंत रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
जुलाई में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, Google और Apple से अगली सुनवाई से पहले विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अगली सुनवाई जुलाई में होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया, तो भारत में ऐप रेगुलेशन और डिजिटल कंटेंट मॉनिटरिंग में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
