किसलय शानू: रांची

झारखंड, बिहार, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के डीजीपी और मुख्य सचिव अब मानव तस्करी की रोकथाम और लापता बच्चों की खोज के लिए एक कार्य योजना और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करने के उद्देश्य से एकत्रित होने जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के तहत चार राज्यों के पुलिस और प्रशासन ने बैठक की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से चारों राज्यों के संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है, जिसमें बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जी. गणेश बनाम स्टेट ऑफ तमिलनाडु मामले में जोनल कंसल्टेशन ईस्टर्न ज़ोन कमेटी की स्थापना की गई है। यह समिति मानव तस्करी और लापता बच्चों से संबंधित मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगी। बैठक 25 जुलाई को सुबह 11 बजे दिल्ली में आयोजित की जाएगी और इसका समापन दोपहर 3.30 बजे होगा। झारखंड पुलिस ने वर्ष 2024 से लेकर मई 2026 तक के लापता और बरामद बच्चों की रिपोर्ट भी तैयार कर ली है।

सुप्रीम कोर्ट को जानकारी प्रस्तुत की जाएगी

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का पालन करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट संबंधित समिति को प्रस्तुत की जाएगी, ताकि आगामी सुनवाई, जो 05 अगस्त 2026 को होगी, के दौरान अदालत को आवश्यक जानकारी प्रदान की जा सके।

बैठक में चर्चा के लिए प्रमुख एजेंडें

  1. गुमशुदा बच्चों का पोर्टल: समिति को यह जानकारी दी जाएगी कि क्या राज्य में CCTNS और मिशन वात्सल्य के अतिरिक्त गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी से संबंधित कोई विशेष राज्य-स्तरीय पोर्टल मौजूद है। यदि ऐसा है, तो उसकी कार्यप्रणाली और सफलता दर पर चर्चा की जाएगी।
  2. मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (AHTU): राज्य में मानव तस्करी विरोधी इकाइयों की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें कार्यरत AHTU की संख्या, स्टाफिंग का विवरण, और पिछले दो वर्षों में दर्ज किए गए गुमशुदा बच्चों और बाल तस्करी के मामलों की जानकारी शामिल होगी।
  3. बाल देखभाल संस्थान (CCIs): बाल देखभाल संस्थानों की संख्या और उनके वर्गीकरण, साथ ही प्रत्येक संस्थान में बच्चों की संख्या एवं गुमशुदा बच्चों के पुनर्वास के लिए किए गए प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
  4. जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPUs): जिला बाल संरक्षण इकाइयों की स्थिति, पिछले दो वर्षों में संभाले गए मामलों की संख्या और पुनर्वास प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।
  5. गुमशुदा बच्चों के लिए जिला कार्यबल (DTF): राज्य में गुमशुदा बच्चों के लिए जिला कार्यबल की स्थिति और पिछले दो वर्षों में उनके कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।
  6. नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाएं: अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई सफल तकनीकें और पहल साझा की जा सकती हैं जो गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी के पीड़ितों की पहचान, सुरक्षा और पुनर्वास में सहायक रही हैं।

31 दिसंबर 2025 तक झारखंड में 148 बच्चे लापता

झारखंड पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 के अंत तक 72 बच्चे लापता रहे। इसके बाद, वर्ष 2024 में 542 बच्चे गुम हो गए, जिनमें से 505 बच्चों को बरामद किया गया, जिससे 80 बच्चे अभी भी लापता हैं। वर्ष 2025 में, 717 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 625 को बरामद किया गया, इस प्रकार वर्ष के अंत तक 148 बच्चे अभी भी लापता हैं।