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केंद्रीय वित्त मंत्री का बजट 2026-27 पेश
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में बजट 2026-27 प्रस्तुत किया, जो कि एक ऐतिहासिक पहल है। यह पहली बार है जब देश का आम बजट रविवार को पेश किया गया। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने घरेलू निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, एमएसएमई, अवसंरचना और वित्तीय सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए “विकसित भारत” की योजना साझा की।
स्वास्थ्य के बदलते परिदृश्य पर जोर
वित्त मंत्री ने भारत में तेजी से बढ़ते गैर-संचारी रोगों जैसे कि डायबिटीज़, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जैविक दवाएँ (Biologics) लंबी उम्र और बेहतर जीवन की गुणवत्ता के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा, सरकार ने “बायोफार्मा शक्ति” पहल की घोषणा की, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
उद्योग और विनिर्माण को नई रफ्तार
बजट में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, कैपिटल गुड्स और कंटेनर निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है। भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों को बढ़ावा देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स के तहत 40,000 करोड़ रुपये की निवेश योजना पेश की गई है।
वस्त्र, खेल सामग्री और पारंपरिक उद्योगों के लिए समर्थन
रोजगार बढ़ाने के लिए वस्त्र क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय फाइबर नीति और टेक्सटाइल रोजगार योजना का एकीकृत रूप से कार्यान्वयन किया जाएगा। इसके साथ ही, भारत को खेल सामग्री का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए विशेष योजना की घोषणा की गई।
एमएसएमई को विकास का इंजन
वित्त मंत्री ने एमएसएमई को अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन मानते हुए एक त्रि-स्तरीय रणनीति पेश की। इसमें 10,000 करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड और आत्मनिर्भर भारत फंड में बढ़ी हुई सहायता शामिल है।
अवसंरचना विकास और पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना की जाएगी।
बैंकिंग, निवेश और कर सुधार विचार
बजट में “विकसित भारत के लिए बैंकिंग” विषय पर उच्च-स्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव है। विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाया जाएगा, और नया आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
सेवा क्षेत्र, कौशल और रोजगार पर फोकस
सरकार ने सेवा क्षेत्र को विकास का नया आधार बनाते हुए शिक्षा से रोजगार तक एक स्थायी उच्च-स्तरीय समिति गठित की है। स्वास्थ्य क्षेत्र में एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म को बढ़ावा दिया जाएगा।
शिक्षा, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के उपाय
शिक्षा क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर के पास नए शैक्षणिक केंद्रों और छात्राओं के लिए छात्रावास स्थापित करने का प्रस्ताव है। पर्यावरण संरक्षण में बिग कैट संरक्षण और इको-टूरिज़्म के कार्यक्रम शामिल हैं।
कृषि, ग्रामीण विकास और समावेशन पर ध्यान
कृषि में उच्च-मूल्य फसलों और बागवानी को बढ़ावा दिया जाएगा। श्री मार्ट्स जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने का लक्ष्य है।
राजकोषीय अनुशासन और वित्तीय स्थिति
सरकार ने 2030-31 तक ऋण-GDP अनुपात को 50% तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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